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#☝ मेरे विचार
☝ मेरे विचार - humarenunur nCs जब भी प्रशंसा मिले तो उसे परमात्मा की ओर मोड़ दीजिए जंब भी हम कोई ऐसा काम करें कि हमें परिणाम में बहुत प्रशंसा मिले तो तुरंत इस तारीफ को परमात्मा की ओर मोड़ दीजिए और अपने को समझाइए कि यह अवसर ईश्वर का दिया हुआ है। बेशक परिश्रम हमने किया, पर उसकी कृपा मिली है। पक्षीराज गरुड़ धन्यवाद दे रहे थे काकभुशुंडि को, तो काकभुशुंडि जी ने कहा- पठइ मोह मिस खगपति तोही, दीन्हि बड़ाई मोही। पक्षीराज, रघुनाथ जी ने आपको यहां যম্লুবনি भेज कर मुझे बड़ाई दी है। क्योंकि गरुड़ जी को संदेह हुआ था, शंकर লিব  काकभुशुंडि के पास भेजा। श्रोता की कक्षा के जी ने कथा सुनने  ऊंची थी, वो राजा था और वक्ता एक कौवा। ये जो काकभुशुंडि 7 ने कहा कि मुझे बड़ाई दी है ईश्वर ने, ये हमेशा याद रखें। हम जब भी कोई काम करते हैं॰ दो बातें सोचते हैं। दिमाग में अटकलों के कारण हम बहुत सारी चीजें तय कर लेते हैं जबकि बाहर यथार्थ कुछ और होता है। यथार्थ भी देखें। जो आपने सोच लिया वही सही नहीं है। ईश्वर की इच्छा मानें और काम करके अच्छा परिणाम दें। Facebook:Pt Vijayshankar Mehta  humarenunur nCs जब भी प्रशंसा मिले तो उसे परमात्मा की ओर मोड़ दीजिए जंब भी हम कोई ऐसा काम करें कि हमें परिणाम में बहुत प्रशंसा मिले तो तुरंत इस तारीफ को परमात्मा की ओर मोड़ दीजिए और अपने को समझाइए कि यह अवसर ईश्वर का दिया हुआ है। बेशक परिश्रम हमने किया, पर उसकी कृपा मिली है। पक्षीराज गरुड़ धन्यवाद दे रहे थे काकभुशुंडि को, तो काकभुशुंडि जी ने कहा- पठइ मोह मिस खगपति तोही, दीन्हि बड़ाई मोही। पक्षीराज, रघुनाथ जी ने आपको यहां যম্লুবনি भेज कर मुझे बड़ाई दी है। क्योंकि गरुड़ जी को संदेह हुआ था, शंकर লিব  काकभुशुंडि के पास भेजा। श्रोता की कक्षा के जी ने कथा सुनने  ऊंची थी, वो राजा था और वक्ता एक कौवा। ये जो काकभुशुंडि 7 ने कहा कि मुझे बड़ाई दी है ईश्वर ने, ये हमेशा याद रखें। हम जब भी कोई काम करते हैं॰ दो बातें सोचते हैं। दिमाग में अटकलों के कारण हम बहुत सारी चीजें तय कर लेते हैं जबकि बाहर यथार्थ कुछ और होता है। यथार्थ भी देखें। जो आपने सोच लिया वही सही नहीं है। ईश्वर की इच्छा मानें और काम करके अच्छा परिणाम दें। Facebook:Pt Vijayshankar Mehta - ShareChat