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देवशयनी एकादशी भगवान विष्णु के चार महीने की योगनिद्रा (चातुर्मास) में जाने, आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की इस तिथि से आध्यात्मिक साधना और संयम का नया दौर शुरू होता है।योगनिद्रा और चातुर्मास का रहस्यक्षीर सागर में विश्राम: इस दिन भगवान विष्णु क्षीर सागर में शेषनाग की शय्या पर चार महीने के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं।पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान विष्णु ने राजा बलि को वचन दिया था कि वे हर साल कुछ समय उनके लोक में निवास करेंगे। इसलिए वे आषाढ़ शुक्ल एकादशी से कार्तिक शुक्ल एकादशी (देव उठनी एकादशी) तक बलि के यहाँ और योगनिद्रा में रहते हैं भगवान विष्णु के योगनिद्रा में जाने के बाद सृष्टि का कारोबार भगवान शिव (महादेव) अपने हाथों में संभाल लेते हैं भगवान विष्णु के विश्राम काल में पूरी सृष्टि की सुरक्षा और संचालन की जिम्मेदारी शिवजी के पास आ जाती है।सावन का महत्व: यही कारण है कि चातुर्मास की शुरुआत में ही सावन का महीना आता है, जिसमें महादेव की विशेष पूजा की जाती है।कार्तिक में वापसी: देवउठनी एकादशी के दिन जब भगवान विष्णु जागते हैं, तब महादेव पुनः सृष्टि का कार्यभार उन्हें सौंप देते हैं
🙏जय शिव शंकर जी 🙏#नाराण #mahadev