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#☝ मेरे विचार
☝ मेरे विचार - '3ಇ ೧೦1 जीनेळीरह पं. विजयशंकर मैहता humarehanuman@gmailcom दिनभर में कुछ्शब्द ऐसे बोलें, जो अत्यंत मोहक हों fi अधूरे अमर्यादित   वाक्यांशों को বখিযাং बनाकर 7 ऑनलाइन लड़ाइयां लडी जा रही हैं। कुछ लोग तो डिजिटल मीडिया  पर शब्दों को फांसी के फंदे पर चढ़ाने का ही काम कर रहे हैं। हमारे  देश के भविष्य के लिए जो आदर्श दृश्य तैयार किया जा रहा है, उसमें अभी से शब्दों की गरिमा बचाने का प्रयास किया जाना जवाबदेह   नौकरशाह चाहिए। सरकार श्रष्टचार gqగ वरना मूल्य आधारित परिवार, नैतिक धर्म संस्कार आधारित समाज जागरूक जनता और विश्वगुरु राष्ट्र- ये सब सपना ही जाएंगे। ಕ संयोग से आज रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती है। १६५ साल गए, लेकिन उनके शब्दों में आज भी पूजित भाव है। दो देशों राष्ट्रगान आज भी उनके नाम पर हैं उनका एक॰एक शब्द आत्मा स्पर्श करके निकलता है। कोई व्यक्ति ऐसे ही जन, गण और मन को अपने शब्द नहीं दे सकता। इस समय जब भाषा दांव पर लगी हम कम से कम टैगोर जी से ये सीखें कि दिनभर में कुछ शब्द 8, ऐसे बोलें  जो अत्यंत मोहक, मनोहर, सम्मोहक और रमणीय हों। Facebook:Pt. Vijayshankar Mchta '3ಇ ೧೦1 जीनेळीरह पं. विजयशंकर मैहता humarehanuman@gmailcom दिनभर में कुछ्शब्द ऐसे बोलें, जो अत्यंत मोहक हों fi अधूरे अमर्यादित   वाक्यांशों को বখিযাং बनाकर 7 ऑनलाइन लड़ाइयां लडी जा रही हैं। कुछ लोग तो डिजिटल मीडिया  पर शब्दों को फांसी के फंदे पर चढ़ाने का ही काम कर रहे हैं। हमारे  देश के भविष्य के लिए जो आदर्श दृश्य तैयार किया जा रहा है, उसमें अभी से शब्दों की गरिमा बचाने का प्रयास किया जाना जवाबदेह   नौकरशाह चाहिए। सरकार श्रष्टचार gqగ वरना मूल्य आधारित परिवार, नैतिक धर्म संस्कार आधारित समाज जागरूक जनता और विश्वगुरु राष्ट्र- ये सब सपना ही जाएंगे। ಕ संयोग से आज रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती है। १६५ साल गए, लेकिन उनके शब्दों में आज भी पूजित भाव है। दो देशों राष्ट्रगान आज भी उनके नाम पर हैं उनका एक॰एक शब्द आत्मा स्पर्श करके निकलता है। कोई व्यक्ति ऐसे ही जन, गण और मन को अपने शब्द नहीं दे सकता। इस समय जब भाषा दांव पर लगी हम कम से कम टैगोर जी से ये सीखें कि दिनभर में कुछ शब्द 8, ऐसे बोलें  जो अत्यंत मोहक, मनोहर, सम्मोहक और रमणीय हों। Facebook:Pt. Vijayshankar Mchta - ShareChat