ShareChat
click to see wallet page
search
#चांदनी जब नाम पूछे,
चांदनी जब नाम पूछे, - चांदनी जब नाम तुम कहो हम क्या बताएं प्रीत के ये गीत बोलो कब तलक हम गुनगुनाएं हां तुम्हारे कुंतलों की छांह ने निंदिया संवारी हां तुम्हारी दृष्टि ने विधु की विभा मेरे संवारी हां तुम्हारे चित्र ने साकार मेरी भावना की और हां स्पर्श् ने मेरे हृदय को चेतना दी "अहं ब्रमहास्मि" के वाग्जालों में फंसे हम पर जिंदगी पर है तुम्हारा , किस तरह, अनग्रह बताएं ने छूकर अधर को, बोल सीखे हैं ` R शब्द और पा स्पर्श, आशा के खुले हैं राज द्वारे ओढ़नी अहसास की लहराई पा इंगित तुम्हारा अर्थके अनुपात से अभिप्राय जुड़ता सा हमारा पर शिराओं में संवरती शिंजिनी की झनझनाहट से सपन रंग कर नयन में किस तरह बोलो सजाएं हां तुम्हारे आलते ने अल्पना के चित्र खींचे हां तुम्हारे होंठ ने हैं प्यास को मधुघट उलीचे हां तुम्हारी अचर्ना ने दीप को सौंपी शिखाएं हां तुम्हारे पग-कमल से मंत्रणा करतीं दिशाएं क्षितिज की अलगनी पर सांझ के लटके रवि सी चांदनी जब नाम तुम कहो हम क्या बताएं प्रीत के ये गीत बोलो कब तलक हम गुनगुनाएं हां तुम्हारे कुंतलों की छांह ने निंदिया संवारी हां तुम्हारी दृष्टि ने विधु की विभा मेरे संवारी हां तुम्हारे चित्र ने साकार मेरी भावना की और हां स्पर्श् ने मेरे हृदय को चेतना दी "अहं ब्रमहास्मि" के वाग्जालों में फंसे हम पर जिंदगी पर है तुम्हारा , किस तरह, अनग्रह बताएं ने छूकर अधर को, बोल सीखे हैं ` R शब्द और पा स्पर्श, आशा के खुले हैं राज द्वारे ओढ़नी अहसास की लहराई पा इंगित तुम्हारा अर्थके अनुपात से अभिप्राय जुड़ता सा हमारा पर शिराओं में संवरती शिंजिनी की झनझनाहट से सपन रंग कर नयन में किस तरह बोलो सजाएं हां तुम्हारे आलते ने अल्पना के चित्र खींचे हां तुम्हारे होंठ ने हैं प्यास को मधुघट उलीचे हां तुम्हारी अचर्ना ने दीप को सौंपी शिखाएं हां तुम्हारे पग-कमल से मंत्रणा करतीं दिशाएं क्षितिज की अलगनी पर सांझ के लटके रवि सी - ShareChat