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#बलिदान दिवस #शहीद दिवस #🙏🏻माँ तुझे सलाम #🇮🇳 देशभक्ति #आज जिनकी पुण्यतिथि है
बलिदान दिवस - को अपने हरम में लाना चाहता था अकबर। रानी दुर्गावती ऐसे थे अकबर महान!लानत है इतिहासकारों पर। आज जिनका बलिदान दिवस है शतन्शत नमन वीरगति २४ जून 1 ५६४ रानी दुम ।विती तथाकथित महान् मुग़ल शासक अकबर भी राज्य को जीतकर रानी को अपने हरम में डालना 24 న1564 चाहता था। उसने विवाद प्रारम्भ करने हेतु रानी के प्रिय सफेद हाथी (सरमन) और उनके विश्वस्त वजीर आधारसिंह को भेंट के रूप में अपने पास भेजने को कहा। रानी ने यह मांग ठुकरा दी। डस्  पर अकबर ने अपने एक रिश्तेदार आसफ़ ख़ाँ के नेतृत्व " में गोंडवाना पर हमला कर दिया। एक बार तो आसफ़ ख़ाँ पराजित हुआ, पर अगली बार उसने दोगुनी सेना और तैयारी के साथ हमला  दूर्गवन्ही दरअसल, इस देश की आन॰ बान और शान बोला। के पास उस समय बहुत कम उन्होंने जबलपुर के पास 'नरई नाले' के सैनिक की रक्षा का इतिहास अनेक वीर के सपूतों में युद्ध किनारे मोर्चा लगाया तथा स्वयं पुरुष वेश " खून से लिखा गया है। बलिदानों की লনী इसी ননূল किया। का फेहरिस्त में एक नाम आता है रानी दुर्गावती इस युद्ध में ३,००० मुग़ल सैनिक मारे गये का (Rani Durgavati)l जिनका जन्म 5 लेकिन रानी की भी अपार क्षति हुई थी। अगले अक्टूबर, १५२४ को चंदेल राजा कीर्तिसिंह दिन २४ जून, १५६४ को मुग़ल सेना ने फिर हमला शालिवाहन के घर हुआ। वो कीर्तिसिंह की बोला। आज रानी का पक्ष दर्बल था, अतः रानी ने एकलौती पुत्री थीं। उनके पिता उन्हें प्यार से अपने पुत्र नारायण को सुरक्षित स्थान पर भेज  जब बहुत छोटी थीं दिया। तभी एक तीर उनकी भुजा में लगा, रानी ने दुर्गावती  थे। ர बुलाते उसे निकाल फेंका।  तीर ने उनकी आंख को तभी   इनकी स्वर्गवास होगया। !=# माता @ कीर्तिसिंह  बेध दिया, रानी  भी निकाला पर उसकी जिसके कारण इनके पिता राजा ন नोक आंख में ही रह गयी। तभी तीसरातीर रानी की ही किया। ললন-এালন इनका गर्दन में आकर धंस गया। को अपने हरम में लाना चाहता था अकबर। रानी दुर्गावती ऐसे थे अकबर महान!लानत है इतिहासकारों पर। आज जिनका बलिदान दिवस है शतन्शत नमन वीरगति २४ जून 1 ५६४ रानी दुम ।विती तथाकथित महान् मुग़ल शासक अकबर भी राज्य को जीतकर रानी को अपने हरम में डालना 24 న1564 चाहता था। उसने विवाद प्रारम्भ करने हेतु रानी के प्रिय सफेद हाथी (सरमन) और उनके विश्वस्त वजीर आधारसिंह को भेंट के रूप में अपने पास भेजने को कहा। रानी ने यह मांग ठुकरा दी। डस्  पर अकबर ने अपने एक रिश्तेदार आसफ़ ख़ाँ के नेतृत्व " में गोंडवाना पर हमला कर दिया। एक बार तो आसफ़ ख़ाँ पराजित हुआ, पर अगली बार उसने दोगुनी सेना और तैयारी के साथ हमला  दूर्गवन्ही दरअसल, इस देश की आन॰ बान और शान बोला। के पास उस समय बहुत कम उन्होंने जबलपुर के पास 'नरई नाले' के सैनिक की रक्षा का इतिहास अनेक वीर के सपूतों में युद्ध किनारे मोर्चा लगाया तथा स्वयं पुरुष वेश " खून से लिखा गया है। बलिदानों की লনী इसी ননূল किया। का फेहरिस्त में एक नाम आता है रानी दुर्गावती इस युद्ध में ३,००० मुग़ल सैनिक मारे गये का (Rani Durgavati)l जिनका जन्म 5 लेकिन रानी की भी अपार क्षति हुई थी। अगले अक्टूबर, १५२४ को चंदेल राजा कीर्तिसिंह दिन २४ जून, १५६४ को मुग़ल सेना ने फिर हमला शालिवाहन के घर हुआ। वो कीर्तिसिंह की बोला। आज रानी का पक्ष दर्बल था, अतः रानी ने एकलौती पुत्री थीं। उनके पिता उन्हें प्यार से अपने पुत्र नारायण को सुरक्षित स्थान पर भेज  जब बहुत छोटी थीं दिया। तभी एक तीर उनकी भुजा में लगा, रानी ने दुर्गावती  थे। ர बुलाते उसे निकाल फेंका।  तीर ने उनकी आंख को तभी   इनकी स्वर्गवास होगया। !=# माता @ कीर्तिसिंह  बेध दिया, रानी  भी निकाला पर उसकी जिसके कारण इनके पिता राजा ন नोक आंख में ही रह गयी। तभी तीसरातीर रानी की ही किया। ললন-এালন इनका गर्दन में आकर धंस गया। - ShareChat