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212 212 212 2 इस मुहब्बत से किस को मिला है कुछ गिले शिक्वे इसका सिला है हर सूँ बस हुस्न ही हुस्न दिखता खुद नुमाई का मेला लगा है अब करूँ किस से शिक्वे गिले में है न उसकी न मेरी खता है जख्म जो प्यार में था मिला वो आज भी दिल का मेरे हरा है यूँ तराशा मुहब्बत से उसको उस खुदा की कला ने छला है रूह बन के मिलेंगे कही अब इश्क पर जोर किसका चला है ( लक्ष्मण दावानी ✍ ) 5/3/2017 #📜मेरी कलम से✒️ #✒ शायरी #💝 शायराना इश्क़ #शायरी #📚कविता-कहानी संग्रह
📜मेरी कलम से✒️ - उस खुदा की कला ने छला है इस मृहब्बत से किस को मिला है कुछ गिले शिक्वे इसका सिला है हर सूँ बस हूस्न ही हुस्न दिखता  मेला लगा है खुद नुमाई क अब करूँ किस से शिक्वे गिले में उसकी न मेरी 8 7 98 ग मोहब्बत का मिला था जख्म जो आज भी दिल का मेरे हरा है ড়া से उसको যুঁ নবথা मृहब्बत कला ने छला है उस खुदा की ल बन के  मिलेंगे कही अब रूह इश्क पर जोर किसका चला है লঃসতা নানানী उस खुदा की कला ने छला है इस मृहब्बत से किस को मिला है कुछ गिले शिक्वे इसका सिला है हर सूँ बस हूस्न ही हुस्न दिखता  मेला लगा है खुद नुमाई क अब करूँ किस से शिक्वे गिले में उसकी न मेरी 8 7 98 ग मोहब्बत का मिला था जख्म जो आज भी दिल का मेरे हरा है ড়া से उसको যুঁ নবথা मृहब्बत कला ने छला है उस खुदा की ल बन के  मिलेंगे कही अब रूह इश्क पर जोर किसका चला है লঃসতা নানানী - ShareChat