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2122 1122 1122 22 दिल में इक दर्द रूहानी सा उठा हो जैसे उस ने चुपके से मिरा नाम लिया हो जैसे सुर्ख आँखों से छलक आया लहू उनके भी ख्वाब आँखों में मुहब्बत का जला हो जैसे जख्म इक और मेरे दिल पे लगा दो यारो दर्द दिल का मेरे उसकी ही दुआ हो जैसे हर सू बिखरी है महकती हुई खुशबू उसकी चल रही प्रेम की उनके जयों हवा हो जैसे कर नहीं सकते शिकायत यूँ जफ़ा की उनके ये सजा अपने लिये खुद से चुना हो जैसे दर बदर फिरते रहे तुमसे जुदा होकर हम यूँ मिली तुमसे मुहब्बत की सजा हो जैसे ( लक्ष्मण दावानी ✍ ) 23/1/2017 #📚कविता-कहानी संग्रह #शायरी #💝 शायराना इश्क़ #✒ शायरी #📜मेरी कलम से✒️
📚कविता-कहानी संग्रह - उस ने से मिरा ತಾ नाम लिया हो जैसे गज़ल दिल में इकवर्द रूहानी सा ನನ: उस ने चुपके से निरानाम लियाहरजैसे छलक आया लहू उनके भी आँखों से ತತ में मुहब्बत पाला जैसे आँख ख्वाब a दिल को मेरे कोई छु नहीं सकता अब जख्म दर्द दिल का मेरे उसकी ही दुआ हो जैसे हर सू   बिखरी है महकती हुई ख़ुशबू उसकी चल रही प्रेम की उनके जुंहवा हो जैसे कर नहीं सकते शिकायत यूँ जफ़ा की तेरे चुना हो जैसे ये सजा अपने लिये खुद दर बदर फिरते रहे तुमसे जुदा होकर हम যুঁ সিলী मुहब्बत कीसजा हो जैसे तुमसे लक्ष्मण दावानी  ما ಹ.n  उस ने से मिरा ತಾ नाम लिया हो जैसे गज़ल दिल में इकवर्द रूहानी सा ನನ: उस ने चुपके से निरानाम लियाहरजैसे छलक आया लहू उनके भी आँखों से ತತ में मुहब्बत पाला जैसे आँख ख्वाब a दिल को मेरे कोई छु नहीं सकता अब जख्म दर्द दिल का मेरे उसकी ही दुआ हो जैसे हर सू   बिखरी है महकती हुई ख़ुशबू उसकी चल रही प्रेम की उनके जुंहवा हो जैसे कर नहीं सकते शिकायत यूँ जफ़ा की तेरे चुना हो जैसे ये सजा अपने लिये खुद दर बदर फिरते रहे तुमसे जुदा होकर हम যুঁ সিলী मुहब्बत कीसजा हो जैसे तुमसे लक्ष्मण दावानी  ما ಹ.n - ShareChat
बिन तेरे होली ये मनाऊँ में कैसे रंग अपने अंग लगाऊँ में कैसे लाल पीले नीले हरे रंग ये सब काँपते हाथो से उड़ाऊँ में कैसे जल रही अरमानो की दिलमे होली फिर उमंगे दिल मे जगाऊँ में कैसे झाँकती है चाँदनी जिन गलियों से घर बुला कर अपने ये लाऊँ में कैसे सुर सभी जीवन के बिखर चुके मेरे इन लबो पे फिर से सजाऊँ में कैसे टूटते है ख्वाब मेरे रोज़ अब भी भूल रंजो गम मुस्कराऊँ में कैसे मुंतिजर ही जब न रहा कोई मेरा गैर को फिर अपना बनाऊं में कैसे ( लक्ष्मण दावानी ✍ ) 1/3/2018 #📜मेरी कलम से✒️ #✒ शायरी #💝 शायराना इश्क़ #शायरी #📚कविता-कहानी संग्रह
📜मेरी कलम से✒️ - बिन तेरे होली ये । पगाऊँ मत ಹಿ अपने रंग अंग नीले सब 1 लाल पीले काँपते हाथो से उड़ाऊँ 8 जल रही अरमानो की दिलमे होली फिर उमंगे दिलमे जिगाऊँ में कैसे झाँकती है चाँदनी जिन गलियों से घर बुला कर अपने ये लाऊँ में कैसे सुर सभी जीवन के बिखर चुके मेरे इन लबो पेफिर से सजाऊँ में कैसे टूटते है ख्वाब मेरे रोज़ अब भी भूल रंजो गम मुस्कराऊँ में कैसे मुंतिजर ही जब न रहा कोई मेरा गैरको फिर अपना बनाऊं में कैसे ( লঃসতা মাবানী ৫ ) 1 /2 /9019 बिन तेरे होली ये । पगाऊँ मत ಹಿ अपने रंग अंग नीले सब 1 लाल पीले काँपते हाथो से उड़ाऊँ 8 जल रही अरमानो की दिलमे होली फिर उमंगे दिलमे जिगाऊँ में कैसे झाँकती है चाँदनी जिन गलियों से घर बुला कर अपने ये लाऊँ में कैसे सुर सभी जीवन के बिखर चुके मेरे इन लबो पेफिर से सजाऊँ में कैसे टूटते है ख्वाब मेरे रोज़ अब भी भूल रंजो गम मुस्कराऊँ में कैसे मुंतिजर ही जब न रहा कोई मेरा गैरको फिर अपना बनाऊं में कैसे ( লঃসতা মাবানী ৫ ) 1 /2 /9019 - ShareChat
221 1221 1221 122 किससे कहें अपने दिले जज्बात की मुश्किल दीवार बनी सिर्फ खयालात की मुश्किल बन के कहर बरसते है जब दिल पे हमारे बर्दास्त अब जो होते नहीं हालात की मुश्किल ठहरे है लबो पर कब से कहने को तुमसे इन कपकपाते होठोसे निकले बात की मुश्किल अब भी है कदमो के निशाँ इस दिल में तुमारे अब जो रही न दिल में तेरे औकात की मुश्किल उम्मीदे जगाये दिल में राहो में खड़े तन्हा होती नहीं जो तुमसे इक मुलाक़ात की मुश्किल इतनी जल्दी क्या थी छोड़ जाने की हमको दिल में रह गये अधूरे इन सवालात की मुश्किल ( लक्ष्मण दावानी ✍ ) 22/1/2017 #📚कविता-कहानी संग्रह #शायरी #💝 शायराना इश्क़ #✒ शायरी #📜मेरी कलम से✒️
📚कविता-कहानी संग्रह - दिल में रह गये अधूर इन सवालात की मुश्किल गज़ल किससे कहें अपने दिले जज्बातकी मुश्किल बनी सिर्फ की ीवार मुश्किल R9MMIq दिल पे हमारे है बवककहर बरसते জন नहीं हालात की मुश्किल बदार होते अब जा ठहरे है लबो पर   कब से कहने को तुमसे इन क्रपकपाते होठोसे निकले बात की मुश्किल अब भी है कदमो के निशाँ इस दिल में तुमारे अब जो रही न दिल में तेरे औकात की मुश्किल राहो में खड़े तन्हा GH பப মিল স नहीं जो इक मुलाक़ात की मुश्किल होती 4 इतनी जल्दी क्याथी छोड़ जाने की हमको दिल में रह गये अधूरे इन सवालात की मुश्किल ( लक्ष्मण दावानी दिल में रह गये अधूर इन सवालात की मुश्किल गज़ल किससे कहें अपने दिले जज्बातकी मुश्किल बनी सिर्फ की ीवार मुश्किल R9MMIq दिल पे हमारे है बवककहर बरसते জন नहीं हालात की मुश्किल बदार होते अब जा ठहरे है लबो पर   कब से कहने को तुमसे इन क्रपकपाते होठोसे निकले बात की मुश्किल अब भी है कदमो के निशाँ इस दिल में तुमारे अब जो रही न दिल में तेरे औकात की मुश्किल राहो में खड़े तन्हा GH பப মিল স नहीं जो इक मुलाक़ात की मुश्किल होती 4 इतनी जल्दी क्याथी छोड़ जाने की हमको दिल में रह गये अधूरे इन सवालात की मुश्किल ( लक्ष्मण दावानी - ShareChat
2122 1212 22/112 पूछ मत कौन याद आता है इक सिवा तेरे कौन भाता है खो दिया खो के तुम्हे सब मैंने हिज्रे गम ये हमे रुलाता है ढल गये रात दिन सुहाने सब रह गया अंधेरो से नाता है बारिशें जब सताती है गम की रात दिन आँसु दिल बहाता है कर रहम अपने बन्दे पर मौला रह के सजदे में जो बुलाता है जोड़ कर रिश्ते दर्द से मेरे चाँद तारो में झिलमिलाता है हर्फ बेघर कलम खफा हमसे रागे सुर भी नज़र चुराता है ( लक्ष्मण दावानी ✍ ) 27/2/2018 #📜मेरी कलम से✒️ #✒ शायरी #💝 शायराना इश्क़ #शायरी #📚कविता-कहानी संग्रह
📜मेरी कलम से✒️ - रात दिन ٢ दिल बहाता पूछ मत कौन याद आता है इक सिवा तेरे कौन भाता है खो दिया खो के तुम्हे सब मैंने हिज्रे गम ये हमे रुलाता है যা ঢল যঠ যন নিন 4 सुहाने Hq रह गया अंधेरो नाता है 4 बारिशें जब सताती है गम की रात दिन आँसु दिल बहाता है ಹ कर रहम अपने   बन्दे पर मौला रह के सजदे में जो बुलाता है ೪ uls &ా Rad ఢెఢే d # বাঁc নাহী ম স্রিলসিলানা $ हर्फ बेघर कलम खफा हमसे रागे सुर भी नज़र चुराता है लक्ष्मण दावानी र ) रात दिन ٢ दिल बहाता पूछ मत कौन याद आता है इक सिवा तेरे कौन भाता है खो दिया खो के तुम्हे सब मैंने हिज्रे गम ये हमे रुलाता है যা ঢল যঠ যন নিন 4 सुहाने Hq रह गया अंधेरो नाता है 4 बारिशें जब सताती है गम की रात दिन आँसु दिल बहाता है ಹ कर रहम अपने   बन्दे पर मौला रह के सजदे में जो बुलाता है ೪ uls &ా Rad ఢెఢే d # বাঁc নাহী ম স্রিলসিলানা $ हर्फ बेघर कलम खफा हमसे रागे सुर भी नज़र चुराता है लक्ष्मण दावानी र ) - ShareChat
2122 2122 2122 212 रह गये आँखों मे आँसू बस मचलने के लिए कुछ बचा ना ज़िन्दगी में और ढलने के लिए जख्म पे मरहम लगाने कोई ना फिर आएगा आएगा जो , आएगा वो मुझे छलने के लिए घिर के आया है अब्र , बूँदे भी बरसने है लगी लड़खड़ाये है कदम फिरसे फिसलने केलिए जख्म जितनेभी छुपाऊँ अपने दिलके मेंयहाँ खोज ही लेते है , वो हमको मसलने के लिए उम्र के अंतिम पलो में खेल खेला वक्त ने हिज्र - ऐ - गम दे दिया तेरा निगलने के लिए धड़कने बेताब है , ओ साँसे भी सहमी मेरी रूह भी तैयार बैठी है निकलने के लिए ( लक्ष्मण दावानी ✍ ) 23/2/2018 #📚कविता-कहानी संग्रह #शायरी #💝 शायराना इश्क़ #✒ शायरी #📜मेरी कलम से✒️
📚कविता-कहानी संग्रह - लिए रह गये आँखों मे आँसू बस मचलने के लिए कुछ बचा ना ज़िन्दगी में और ढलने के जख्म पे मरहम लगाने कोई ना फिर आएगा आएगा वो मुझे  छलने के लिए आएगा जो 0 घिर के आया है अब्र बूँदे भी बरसने है लगी लड़खड़ाये है कदम फिरसे फिसलने केलिए अपने दिलके मेंयहाँ जख्म जितनेभी छुपाऊँ लिए वो हमको मसलने के खोज ही लेते है उम्र के अंतिम पलोर्मे खेल खेला वक्त ने ऐ - गमःदेदिया तेरा निगलने के लिए हिज्र बेताब  # ओ साँसे भी धड़कने 5 सहमी लिए रूह भीतैयार बैठी है निकलने के (नपगचवानी ( लिए रह गये आँखों मे आँसू बस मचलने के लिए कुछ बचा ना ज़िन्दगी में और ढलने के जख्म पे मरहम लगाने कोई ना फिर आएगा आएगा वो मुझे  छलने के लिए आएगा जो 0 घिर के आया है अब्र बूँदे भी बरसने है लगी लड़खड़ाये है कदम फिरसे फिसलने केलिए अपने दिलके मेंयहाँ जख्म जितनेभी छुपाऊँ लिए वो हमको मसलने के खोज ही लेते है उम्र के अंतिम पलोर्मे खेल खेला वक्त ने ऐ - गमःदेदिया तेरा निगलने के लिए हिज्र बेताब  # ओ साँसे भी धड़कने 5 सहमी लिए रूह भीतैयार बैठी है निकलने के (नपगचवानी ( - ShareChat
2122 1212 22/112 काश किस्मत शुमार हो जाती रोशनी बे शुमार हो जाती अंधेरो में न ज़िन्दगी कटती खिल के वो शानदार हो जाती उम्र भर साथ जो तेरा रहता आँख ना अश्कबार हो जाती सारे सुर फिर , रंगीन हो जाते हर गज़ल फिर बयार हो जाती वक्त करता न बे वफाई गर ज़िन्दगी में बहार हो जाती जख्म दिलके अगर दफन होते ज़िन्दगी गम गुसार हो जाती ( लक्ष्मण दावानी ✍ ) 24/2/2018 #📜मेरी कलम से✒️ #✒ शायरी #💝 शायराना इश्क़ #शायरी #📚कविता-कहानी संग्रह
📜मेरी कलम से✒️ - ऑँख ना अश्कबार ৪ী আনী काश किस्मत शुमार होे जाती ঐ থুসা हो जाती रोशनी अंधेरो में कटती जिन्दगी खिल केवो शानदारहो जाती جآ उम्र भर साथ जो तेरा रहता अश्कबार हो जाती आँख ना सारे सुर फिर , रंगीन हो जाते چ हर गज़ल फिर बयार हो जाती नबे वफाई गर करता d ज़िन्दगी में हो जाती R # जख्म दिलके अगर दफन होते ज़िन्दगी गम गुसार हो जाती ( लक्ष्मण दावानी ऑँख ना अश्कबार ৪ী আনী काश किस्मत शुमार होे जाती ঐ থুসা हो जाती रोशनी अंधेरो में कटती जिन्दगी खिल केवो शानदारहो जाती جآ उम्र भर साथ जो तेरा रहता अश्कबार हो जाती आँख ना सारे सुर फिर , रंगीन हो जाते چ हर गज़ल फिर बयार हो जाती नबे वफाई गर करता d ज़िन्दगी में हो जाती R # जख्म दिलके अगर दफन होते ज़िन्दगी गम गुसार हो जाती ( लक्ष्मण दावानी - ShareChat
122 122 122 122 न ढूंढो मुझे अपने परछाइयों में बसा हूँ तेरे दिल कि गहराइयों में गुजरती रही साय ज़ुल्फो में मेरी तेरे हुस्न की यार रानाइयों में अहद इश्क का कर गया गर्क उल्फत सितम सहते है हम ये तन्हाइयों में जलाया मुझे मेरे अपनों ने ही था कहाँ दम चिरागों की रोशनाइयों में सबा कह रही दास्ताँ दर्द की अब रही गूँजती आहें शहनाइयों में छुपा बैठे है सीने में दर्दे उल्फत कभी सुन ले आकर ये चौपाइयों में ( लक्ष्मण दावानी ✍ ) 19/1/2017 अहद - प्रतिज्ञा सबा - ठंडी हवा #📚कविता-कहानी संग्रह #शायरी #💝 शायराना इश्क़ #✒ शायरी #📜मेरी कलम से✒️
📚कविता-कहानी संग्रह - ৪ুঁ নং বিল বি HI गहराइयों मे अपने परछाइयों गें रढो मुझे हूँ तेरे दिल कि गहराइयों में सस में मेरी ஈ எி =ங जुल्फो = 5= கி रानाइयों मे यार अह` इश्क का कर गया गर्क उल्फत सितन सहते है हम ये तन्हाइयों में ग मुझे मेरे अपनों ने ही था ডামো ज़कहं दम चिरागों की रोशनाइयों में कहरही दास्ताँ दर्द की अब सब గ ~  शहनाइयों 7 आहें ತuಹ সীন ৭  ন৫ ওল্ন कभीस॰ले आकर ये चौपाइयों में  लक्ष्मण दावानी 1) ৪ুঁ নং বিল বি HI गहराइयों मे अपने परछाइयों गें रढो मुझे हूँ तेरे दिल कि गहराइयों में सस में मेरी ஈ எி =ங जुल्फो = 5= கி रानाइयों मे यार अह` इश्क का कर गया गर्क उल्फत सितन सहते है हम ये तन्हाइयों में ग मुझे मेरे अपनों ने ही था ডামো ज़कहं दम चिरागों की रोशनाइयों में कहरही दास्ताँ दर्द की अब सब గ ~  शहनाइयों 7 आहें ತuಹ সীন ৭  ন৫ ওল্ন कभीस॰ले आकर ये चौपाइयों में  लक्ष्मण दावानी 1) - ShareChat
22 22 22 2 खोए हो किन राहों में खोजता हूँ पनाहों में हो गया है जब से जुदा सोया नही हूँ रातों में जख्महै ये कितनागहरा सुन सदाएँ तू आहों में तरस गये सब सुनने को बोल दो तेरे मकानों में आवाज सुना के अपनी घोल दे मिश्री कानों में रूठ गये सुर सारे ही दर्द बस्ता है रागों में काटे से कटते नही दिन जलता देख ले शामों में मौत दर पर खड़ी मेरे घुल चुका विष साँसों में ( लक्ष्मण दावानी ✍ ) 23/2/2018 #📜मेरी कलम से✒️ #✒ शायरी #💝 शायराना इश्क़ #शायरी #📚कविता-कहानी संग्रह
📜मेरी कलम से✒️ - 22 22 22 2 खोए हा किन राहों में खोजता हूँ पनाहों में से जुदा हो गया है जिब सोया नही हूँ रातों में जख्महै ये कितनागहरा सुन सदाएँ तू आहों में सुननेको तरस गये सब बोल दो तेरे मकानों भें आवाज सुना के अपनी घोल दे मिशी 6403 7 182 गये सुर सारे ही रूठ बस्ता है रागों में दर्द काटे से कटते नही दिन जलता देख ले शामों में मौत दरपर खडी मेरे घुल चुका विष साँसों में (F8u ಫar < ) 000 Shot on UIO 23/2/2018 Vivo Alcamera 22 22 22 2 खोए हा किन राहों में खोजता हूँ पनाहों में से जुदा हो गया है जिब सोया नही हूँ रातों में जख्महै ये कितनागहरा सुन सदाएँ तू आहों में सुननेको तरस गये सब बोल दो तेरे मकानों भें आवाज सुना के अपनी घोल दे मिशी 6403 7 182 गये सुर सारे ही रूठ बस्ता है रागों में दर्द काटे से कटते नही दिन जलता देख ले शामों में मौत दरपर खडी मेरे घुल चुका विष साँसों में (F8u ಫar < ) 000 Shot on UIO 23/2/2018 Vivo Alcamera - ShareChat
2122 1122 22/112 फिर नजर आए नजारे तेरे वो जमी , वो हि सहारे तेरे भूल जाऊँ में भला कैसे वो साथ जो लम्हे गुजारे तेरे लौट आ फिर तु मेरे आँगन में हर खुशी सदके उतारे तेरे कट रहीं रातें मेरी रो रो कर और भी साथ है प्यारे तेरे जान आफत में पड़ी बिन तेरे मर न जायें ये दुलारे तेरे चोट है दिल पे लगी गहरी ये ज़ख्म है दिल पे करारे तेरे लौट आने में तकल्लुफ न कर चुन लेंगे पांव के आरे तेरे ( लक्ष्मण दावानी ✍ ) 22/2/2018 #📚कविता-कहानी संग्रह #शायरी #💝 शायराना इश्क़ #✒ शायरी #📜मेरी कलम से✒️
📚कविता-कहानी संग्रह - 2122 22/112 1122 फिर नजर आए TR & वो जमी , वो हि सहारे तेरे भूल जाऊँ में भला  कैसे वो लम्हे   गुजारे तेरे जो साथ फिर तु dా 3TT मेरे आँगन में उतारे तेरे सदके हर खुशी कट रहीं रातें मेरी रो रो कर और भी साथ है प्यारे तेरे जान आफत में पड़ी बिन तेरे আয a ये मर न दुलारे चोट है दिल पे लगी 4 गहरी ज़ख्म है दिल पे करारे तेरे लौट आने में तकल्लुफ न कर चुन  लेंगे के आरे तेरे பiq ( লঃসতা মাবানী ৫ ) ^/9/9018 2122 22/112 1122 फिर नजर आए TR & वो जमी , वो हि सहारे तेरे भूल जाऊँ में भला  कैसे वो लम्हे   गुजारे तेरे जो साथ फिर तु dా 3TT मेरे आँगन में उतारे तेरे सदके हर खुशी कट रहीं रातें मेरी रो रो कर और भी साथ है प्यारे तेरे जान आफत में पड़ी बिन तेरे আয a ये मर न दुलारे चोट है दिल पे लगी 4 गहरी ज़ख्म है दिल पे करारे तेरे लौट आने में तकल्लुफ न कर चुन  लेंगे के आरे तेरे பiq ( লঃসতা মাবানী ৫ ) ^/9/9018 - ShareChat
2122 2122 212 फूल था दिल का खिला पहली दफा जब हुआ था सामना पहली दफा छाई रहती थी यूँ दिल में बैचेनी वो सुकूँ दिल का लगा पहली दफा कर गई घायल अदा उनकी मुझे तीर नज़रों का चला पहली दफा नज़रे नज़रो से मिली थी उनके जब उनमे खुदा था दिखा पहली दफा झील सी आँखों में तूफाँ था छुपा उन निगाहों में डुबा पहली दफा इस कदर सुरूर था मुझपे चढ़ा छा गया था वो नशा पहली दफा कितने अरमां दिल के बाकी है अभी जग उठा है हौसला पहली दफा अँधेरे छाये थे जीवन में मेरे दीप ख़ुशी का जला पहली दफा ( लक्ष्मण दावानी ✍ ) 18/1/2017 #📜मेरी कलम से✒️ #✒ शायरी #💝 शायराना इश्क़ #शायरी #📚कविता-कहानी संग्रह
📜मेरी कलम से✒️ - ন ভুনা उन निगाहों পঙ্কলী নক্চা फूल था दिल का खिला पहली दफा दफा ப6ள हुआ था सामना जब थीयू दिल में बैचेनी छाई रहती वो सुकूँ दिल का पहली दफा 4411]][ घायल अदा उनकी मुझे कर गई तीर नज़रों पहली दफा काचला नज़रे नज़रो से मिली थी उनके जब उनमे खुदा दिखा पहली दफा था ग झील सी आँखोंमें तूफाँ था छुपा उन निगाहों में डुबा ೪ पहली दफा मुझपे कदर सुरूर 2 dol इस थावो नशा ল पहली दफा छ। गया कितने अरमां दिल के बाकी है अभी है हौसला पहली दफा जग उठा जीवन में  मेरे अँधेरे   छाये থ दीप पहली ख़ुशी का जला दफा ( लक्ष्मण दावानी ) ন ভুনা उन निगाहों পঙ্কলী নক্চা फूल था दिल का खिला पहली दफा दफा ப6ள हुआ था सामना जब थीयू दिल में बैचेनी छाई रहती वो सुकूँ दिल का पहली दफा 4411]][ घायल अदा उनकी मुझे कर गई तीर नज़रों पहली दफा काचला नज़रे नज़रो से मिली थी उनके जब उनमे खुदा दिखा पहली दफा था ग झील सी आँखोंमें तूफाँ था छुपा उन निगाहों में डुबा ೪ पहली दफा मुझपे कदर सुरूर 2 dol इस थावो नशा ল पहली दफा छ। गया कितने अरमां दिल के बाकी है अभी है हौसला पहली दफा जग उठा जीवन में  मेरे अँधेरे   छाये থ दीप पहली ख़ुशी का जला दफा ( लक्ष्मण दावानी ) - ShareChat