2122 2122
दिल का कुछ उपचार कर ले
चल जरा सा प्यार कर ले
तरसूँ कब तक प्यार को मैं
प्यार का इजहार कर ले
हर कदम है अंधेरा ही
आँखे अब दो चार कर ले
हर्फ यादों में लिखे जो
पढ़ के तू अशआर कर ले
आरजू है बस यही अब
सपने तू साकार कर ले
गम लगा लूँगा गले से
मुझे तू स्वीकार कर ले
( लक्ष्मण दावानी ✍ )
10/10/2017 #📚कविता-कहानी संग्रह #शायरी #💝 शायराना इश्क़ #✒ शायरी #📜मेरी कलम से✒️
2122 1212 22/112
जब नजर हम से वो चुराते है
तब कयामत वो दिल पे ढाते है
रूठ जाऊँ कभी में जो उनसे
भर के बाहों में वो मनाते है
खुशियाँ मोहब्बत में लुटाकर
गम जहाँ भर के हम उठाते है
जख्म दिल पर दिये हमे जिसने
उनसे ही जख्म अब छुपाते है
कुछ मुरव्वत दे साकिया हमको
सजदे में सर तेरे झुकाते है
जान कर नाम बेवफा का वो
अब हमें बेवफा बताते है
बज्मे दुश्मन बता के अब हमको
गैर के नग्मे गुनगुनाते है
( लक्ष्मण दावानी ✍ )
10/10/2017 #📜मेरी कलम से✒️ #✒ शायरी #💝 शायराना इश्क़ #शायरी #📚कविता-कहानी संग्रह
2122 1212 22/112
कहते हो क्या ये दिल्लगी क्या है
क्यों समझते नहीं खुशी क्या है
हमसे हो कर जुदा बता तुमको
इस जहाँ से ख़ुशी मिली क्या है
दर्द कभी तुम समझ कहाँ पाये
चौट दिल पर तेरे लगी क्या है
उम्र इक सजदे में तेरे गुजरी
अब बड़ी इससे बन्दगी क्या है
बिन तेरे पास कब ख़ुशी आई
दर्द की हम से दोस्ती क्या है
मय पिलाना हि छोड़ दी तुमने
फिर लबो पर ये तिश्नगी क्या है
हम खड़े हैं उसी किनारों पर
कौन समझा है ज़िन्दगी क्या है
( लक्ष्मण दावानी ✍ )
1/3/2017 #📚कविता-कहानी संग्रह #शायरी #💝 शायराना इश्क़ #✒ शायरी #📜मेरी कलम से✒️
221 2121 1221 212
बनफूल मोहब्बत का चमनमें खिला हूँ मैं
माँ की दुआएँ लेके सफर पे चला हूँ मैं
माना के गम बहुत है जमाने मे इश्क के
जो सुकूँ दे दिल को महकती हवा हूँ मै
हम मान लेते मोम नही है जिगर मेरा
तेरी ही मोहब्बत में जफ़ा का सिला हूँ मै
काँटो के बीच मे एक गुलाब बन रहा
जो रह गई अधूरी खुदा की रज़ा हूँ मै
गर्दिश-ए-दौर ने हमे उलझा के रख दिया
पूरी न हो सकी जो कभी वो दुआ हूँ मै
पाया था मन्नतों से जिसे मैंने जीस्त में
उनके ही दर पे आज सजदे में पड़ा हूँ मै
( लक्ष्मण दावानी ✍ )
7/10/2017 #📜मेरी कलम से✒️ #✒ शायरी #💝 शायराना इश्क़ #शायरी #📚कविता-कहानी संग्रह
221 2121 1221 212
दिल पर गमो के साए कई साल हो गए
बद किस्मती लिखाए कई साल हो गए
यूँ आँख से लहू बरसता ही रहा मेरी
आँखों को मुस्कराए कई साल हो गए
उम्मीद भी करूँ तो करूँ कैसे में तेरी
अपना ये दिल लुटाए कई साल हो गए
तुम चेहरे का दर्द न पढ़ पाओगे मेरे
ये दर्दे दिल छुपाए कई साल हो गए
हमने सुना है शौक मुहब्बत का तुम्हे है
उल्फत में दिल जलाए कई साल हो गए
कुछ जानते भी हो वफ़ा के बारे में यहाँ
ठोकर वफ़ा में खाए कई साल हो गए
( लक्ष्मण दावानी ✍ )
27/2/2017 #📚कविता-कहानी संग्रह #शायरी #💝 शायराना इश्क़ #✒ शायरी #📜मेरी कलम से✒️
2122 1212 22/112
रूह से तो कभी जुदा न हुआ
पर मोहब्बत पे भी खरा न हुआ
लुट गई दुनियां मुहब्बत में
फिर भी उन से कोई शिफा न हुआ
सजदे में सर झुका रहा हर दम
इश्क का वो मगर खुदा न हुआ
प्यास बुझी नही अभी दिल की
हक अभी इश्क का अदा न हुआ
कत्ल कर के भी कह दिया कातिल
और ज्यादा कुछ भी बुरा न हुआ
आ रही खुशबू इन हवाओं से
उनके यादों से फासला न हुआ
( लक्ष्मण दावानी ✍ )
6/10/2017 #📜मेरी कलम से✒️ #✒ शायरी #💝 शायराना इश्क़ #शायरी #📚कविता-कहानी संग्रह
2122 2122 212
रुख पे वो पर्दा गिराया आज फिर
चाँद आँचल में छुपाया आज फिर
बज्म में अपनी बुला के फिर मुझे
संग गैरो के बिठाया आज फिर
वो बताते तो बताते क्या हमें
बेवफा कह दिल जलाया आज फिर
जो लिखे थे हर्फ नफरत में मेरी
वो ग़ज़ल कह के सुनाया आज फिर
जख्म दिल के ताजे थे पहले से ही
तीर ओ दिल मे चुभाया आज फिर
क्या सुनाते हाले दिल अपना उसे
दोस्त बन दुश्मन बताया आज फिर
रख लबो पे अपने जहरीली हँसी
जश्न उसने युँ मनाया आज फिर
( लक्ष्मण दावानी ✍ )
5/10/2017 #📚कविता-कहानी संग्रह #शायरी #💝 शायराना इश्क़ #✒ शायरी #📜मेरी कलम से✒️
1212 1122 1212 112/22
जिसे चाहा था हमने उसे तो हम पा न सके
तमाम उम्र पता जिनका हम लगा न सके
छुपी रही सदा चाहत दिलो की दिल में मेरे
करीब हो कर मुहब्बत उसे दिखा न सके
सदा तरसते रहे ज़िन्दगी बनाने को जिसे
उसे चाह कर भी अपना कभी बना न सके
मेरी तन्हाई मुझे पागल बना रही है यहाँ
फिसल गया रेत जैसे हाथो में समा न सके
कियेथे वादे मुहब्बत के उसने भी हमने भी
जहाँ के जुल्मो से दोनों ही वो निभा न सके
कदम कदम पे मिली ठोकरे जहाँ की हमें
फिर भी अश्क आँखों से हम बहा न सके
( लक्ष्मण दावानी ✍ )
26/2/2017 #📜मेरी कलम से✒️ #✒ शायरी #💝 शायराना इश्क़ #शायरी #📚कविता-कहानी संग्रह
2122 2122 2122 212
दर्द दिल का अपने सब मेरी नज़र कर दीजिए
अब ये काँटो से भरी मेरी डगर कर दीजिए
चल गयी शमशीर मेरे दिल पे नज़रो की तेरे
अब बना या चाक मेरा ये जिगर कर दीजिए
है बहुत मुश्किल मुहब्बत का सफर ऐ जाने जां
साथ चल के मेरे अपना हम सफर कर दीजिए
हिज्र - ऐ - गम में तेरे घुट के न मर जाऊँ कहीं
कुछ मुहब्बत की इनायत ये इधर कर दीजिए
हम समझ तुमको मसीहा आये है दर पर तेरे
हाल -ऐ - दिल अब मेरा भी बेहतर कर दीजिए
ज़िन्दगी की मेरे साँसे थम रही उनके बिना
आखरी है दम मेरा उनको खबर कर दीजिए
( लक्ष्मण दावानी ✍ )
25/2/2017 #📚कविता-कहानी संग्रह #शायरी #💝 शायराना इश्क़ #✒ शायरी #📜मेरी कलम से✒️
2122 2122 212
गैर को अपना बताना छोड़िये
दोस्ती को आजमाना छोड़िये
रोकते हो क्यूँ कदम तुम अपने अब
मोहब्बत में दिल दुखाना छोड़िये
छाई खामोशी है क्यों ये बज्म में
फिर हसीं कोई तराना छोड़िये
करके रुस्वा मोहब्बत को मेरे अब
इस तरह महफ़िल से जाना छोड़िये
गर नही है मोहब्बत दिल मे तेरे
खाब में आकर जगाना छोड़िये
ओ लगाइये न सर इल्जाम अब
नाम अब बद नाम करना छोड़िये
( लक्ष्मण दावानी ✍ )
4/10/2017 #📜मेरी कलम से✒️ #✒ शायरी #💝 शायराना इश्क़ #शायरी #📚कविता-कहानी संग्रह













