1212 2122 1212 212
बसा है जो रूह में , कैसे में भुलाऊं उसे
ग़ज़ल बहाना करूँ , और गुनगुनाऊँ उसे
महक रहा फूल के खुशबू जैसे घर जिससेये
लगा के मैं जिस्म ओ जान में समाऊँ उसे
उजड़ चुका है मेरा आशियाँ बहारो में जो
बहारें फिर वो बुलाकर कैसे सजाऊँ उसे
रहा कदम दर कदम साथ सदा जो मेरे
कहाँ से अब में ढूँढ़ कर यहाँ में लाऊं उसे
न जाने किसकी नज़र लग गई खुशी को मेरे
बताये कोई मुझे अब में कैसे पाऊँ उसे
उदास दिन , रातें वीरान है मेरी अब यहाँ
घड़ी घड़ी दे के आवाज में बुलाऊँ उसे
( लक्ष्मण दावानी ✍ )
10/2/2018 #📜मेरी कलम से✒️ #✒ शायरी #💝 शायराना इश्क़ #शायरी #📚कविता-कहानी संग्रह
2122 2122 2122
देख के उनको ज़ख्मे दिल गहरा हुआ है
दर्द दिल का मेरे अब दुहरा हुआ है
मायूसी चहरे पे छाई उनके भी थी
दर्द दिल में उनके भी ठहरा हुआ है
कब तलक छुपाते उनसे दर्द दिल का
साँच पर कब आज तक पहरा हुआ है
कौन कहता चाँद तारे तोड़ लाना
चाँदनी पर भी लगा पहरा हुआ है
मौत के आगोश में सो जाने दो अब
बाद मुद्दत के सुकूँ मिलना हुआ है
मत दिखा सपने सुहाने मोहब्बत के
बे वफ़ा का पहले भी मोहरा हुआ है
( लक्ष्मण दावानी ✍ )
10/1/2017 #📚कविता-कहानी संग्रह #शायरी #💝 शायराना इश्क़ #✒ शायरी #📜मेरी कलम से✒️
2212 2212 2212
कैसे निकालूँ दिल से उल्फत में भला
कैसे करूँ खुद से खिलाफत में भला
कोई समझ पाया न मेरा दर्दे दिल
किससे करूँ शिक्वा शिकायत में भला
रौशन है जिससे ये चिरागे दिल मेरा
कैसे करूँ उस से बगावत में भला
करता है हर मुराद जो पूरी मेरी
क्योँ ना करूँ उसकी इबादत में भला
जिस बागबाँ से खुशियाँ हमको मिली
क्योँ छोड़दूँ उसकीही खिदमत में भला
दिल मे भरी है मोहब्बत कितनी मेरे
कैसे दिखाऊँ उनको चाहत में भला
( लक्ष्मण दावानी ✍ )
28/9/2017 #📜मेरी कलम से✒️ #✒ शायरी #💝 शायराना इश्क़ #शायरी #📚कविता-कहानी संग्रह
221 2121 1221 212
तेरी ही धुन में आज कलंदर उदास है
बिन तेरे ज़िन्दगी का मुकद्दर उदास है
फिर से बिखर न जायें ये मोती निगाह से
ये सोच सोच कर ही समंदर उदास है
मैलों के शोर में भी खामोशी छाई है
देखूँ जिधर उधर के ही मंजर उदास है
हर कौने में बसी है तेरे प्यार की महक
इक तेरे ही कमी से मेरा दर उदास है
जो सेज थी सजाई यहाँ मिलके हमने वो
तन्हाई देख कर मेरी बिस्तर उदास है
पूछो न हाले दिल गमे तन्हाई का मेरी
खुश था दुआ से जो ये सिकंदर उदास है
( लक्ष्मण दावानी ✍ )
19/11/2017 #📚कविता-कहानी संग्रह #शायरी #💝 शायराना इश्क़ #✒ शायरी #📜मेरी कलम से✒️
212 212 212 212
जीस्त जिनके लिये आज कुर्बान है
है मिली उनसे ही मुझे पहचान है
सिलसिले प्यार के ख़त्म ना हो कभी
दिल में बस इक यही मेरे अरमान है
घर बनाने में गुजर गयी उम्र जब
किस लिये ज़िन्दगी आज हैरान है
दर्द कागज पे बिकता रहा उम्र भर
बस वही दर्द से मेरे अनजान है
गम करे क्यों अगर वो हमें ना मिले
दिल में तो मेरे अब भी मेहमान है
वक्त - ऐ - मौत तक साथ हो ये इमां
ज़िन्दगी की मेरी जो सदा शान है
( लक्ष्मण दावानी ✍ )
9/1/2017 #📜मेरी कलम से✒️ #✒ शायरी #💝 शायराना इश्क़ #शायरी #📚कविता-कहानी संग्रह
2122 1212 22
दुश्मनो से गले मिला जाये
वक्त के साथ अब चला जाये
हो गई है बेनूर महफ़िल ये
छोड़ कर अब इसे छला जाये
कहते है मतलबी यहाँ पर सब
इनके माहौल में ढला जाये
कट गये बाजू जिनके ज़ुल्मो में
कुछ सबक उनसे भी लिया जाये
देख लिया चलके राहे उल्फत में
हिज्रे गम कब तलक पिया जाये
गम दिया जिसने उम्र भर उन्हें
खुशियों की दुआ दिया जाये
( लक्ष्मण दावानी ✍ )
9/1/2017 #📚कविता-कहानी संग्रह #शायरी #💝 शायराना इश्क़ #✒ शायरी #📜मेरी कलम से✒️
22 22 22 22
बे मतलब हाथ ना मल तू
सच की राहो पर अब चल तू
चहरे पर चहरे है सब के
किसके कितने चहरे लिख तू
दिखते सब इक जैसे ही है
अब के सब से जुदा दिख तू
क्यों करते हो दिल की बाते
अल्फाज ग़ज़लों में लिख तू
तरसे हो दीद को जिस के
मिलन को उससे अब सज तू
लिख डाले जज्बात अपने
समझ अश आर ना पढ़ तू
कर ना खुद से जुदा हमको
लड़ना है हमसे तो लड़ तू
सपनो में जीना ना सीखा
खाब आँखों में ना मढ़ तू
( लक्ष्मण दावानी ✍ )
8/1/2017 #📜मेरी कलम से✒️ #✒ शायरी #💝 शायराना इश्क़ #शायरी #📚कविता-कहानी संग्रह
1222 1222 1222
न कोई अब मुझे मंजिल नज़र आये
तेरे बिन कोई ना साहिल नजर आये
मुकम्मल ना हुआ कोई मेरा अरमां
सभी मरते हुऐ तिल तिल नजर आये
कभी उफ ना किया दुख दर्द सह कर भी
अकेले अब सफर मुश्किल नजर आये
सुलगता है मेरा दिल , आँखे बहती है
न कोई मुझे अब महफ़िल नजर आये
करूँ क्या अब में इस दिल का बताओ तो
मुझे जब मेरा दिल कातिल नज़र आये
नज़र आता है मेरे आँसुओ में जो
उसी को हम सदा बेदिल नज़र आये
( लक्ष्मण दावानी ✍ )
4/2/2018 #📚कविता-कहानी संग्रह #शायरी #💝 शायराना इश्क़ #✒ शायरी #📜मेरी कलम से✒️
122 122 122 12
बिना तेरे सूना मेरा घर यहाँ
खुशी खो गई तुझे खो कर यहाँ
मिटा कर मेरी आँख के तारे को
अंधेरो से है भर दिया दर यहाँ
अधूरी रही हर एक आरजू
सदा ठोकरों में रहा सर यहाँ
कहर ऐसे ढाया मेरे दिल पे अब
तेरी याद में , मैं रहा मर यहाँ
बझाये से बुझती नही प्यास ये
रहें आँखे चाहे सदा तर यहाँ
समय का चला चक्र कुछ ऐसे है
बिलखता रहा खव्हिशे धर यहाँ
( लक्ष्मण दावानी ✍ )
3/2/2018 #📜मेरी कलम से✒️ #✒ शायरी #💝 शायराना इश्क़ #शायरी #📚कविता-कहानी संग्रह
22 22 22 22
खत्म न होंगे अब अंधेरे
सदा रहेंगे हम को घेरे
लौट न आएंगे अब वो दिन
वो रातें और वो सवेरे
करलूं चाहे में जितने जतन
थमेंगे न आँसू ये मेरे
खो गया नामों निशाँ मेरा
वक्त ने इस कदर दिन फेरे
इक तेरे चले जाने से अब
जहाँ भी है आँखे ततेरे
रब रूठा है या के नसीबा
उजड़ गए खुशियों के डेरे
अब भी आँखों पर हैं छाए
खेल बचपन के वो तेरे मेरे
( लक्ष्मण दावानी ✍ )
17/10/2018 #📚कविता-कहानी संग्रह #शायरी #💝 शायराना इश्क़ #✒ शायरी #📜मेरी कलम से✒️













