2122 2122 212
फूल था दिल का खिला पहली दफा
जब हुआ था सामना पहली दफा
छाई रहती थी यूँ दिल में बैचेनी
वो सुकूँ दिल का लगा पहली दफा
कर गई घायल अदा उनकी मुझे
तीर नज़रों का चला पहली दफा
नज़रे नज़रो से मिली थी उनके जब
उनमे खुदा था दिखा पहली दफा
झील सी आँखों में तूफाँ था छुपा
उन निगाहों में डुबा पहली दफा
इस कदर सुरूर था मुझपे चढ़ा
छा गया था वो नशा पहली दफा
कितने अरमां दिल के बाकी है अभी
जग उठा है हौसला पहली दफा
अँधेरे छाये थे जीवन में मेरे
दीप ख़ुशी का जला पहली दफा
( लक्ष्मण दावानी ✍ )
18/1/2017 #📜मेरी कलम से✒️ #✒ शायरी #💝 शायराना इश्क़ #शायरी #📚कविता-कहानी संग्रह
122 122 122 12
नदी आँख से फिर बही रात भर
वही दास्ताँ फिर कही रात भर
सभी तोड़ कर बाँध दिल रो पड़ा
झड़ी आँसुओ की लगी रात भर
तेरी याद ने फिर लि अँगड़ाई वो
हरेक पल बिता इक सदी रात भर
रहा आँसुओ में तेरा अक्स ही
दिले आरजू फिर जली रात भर
वही सिसकियाँ ,आहें भी थी वही
रही फिर वही बे खुदी रात भर
उभर आये मंजर वही आँख में
नजर ढूँढती ही रही रात भर
( लक्ष्मण दावानी ✍ )
20/2/2018 #📚कविता-कहानी संग्रह #शायरी #💝 शायराना इश्क़ #✒ शायरी #📜मेरी कलम से✒️
2122 1212 22
रुख को पर्दे से ना छुपा दिलबर
चाँद सा मुखड़ा तो दिखा दिलबर
रब से मैं माँगता हूँ दुआएँ
बन के आओ मेरे खुदा दिलबर
भर चुके जख्म सब पुराने अब
इक नया जख्म तू लगा दिलबर
रात भर सलवटें ये चुभती हैं
खाब आंखों में फिर बसा दिलबर
राहें अनजान ओ सफर तन्हा
मंजिले तार्रुफ़ तो करा दिलबर
ना गिला है न कोई शिकवा अब
कोई इल्जाम तो लगा दिलबर
रातें कटती हैं खत तेरे पढ़ कर
इनको यूँ तो न तू जला दिलबर
( लक्ष्मण दावानी ✍ )
30/10/2018
गिरह
ज़िन्दगी से बेजार हो चुके
ज़िन्दगी को नहीं मिला दिलबर #📜मेरी कलम से✒️ #✒ शायरी #💝 शायराना इश्क़ #शायरी #📚कविता-कहानी संग्रह
1222 1222 1222 1222
संजो रख्खे हैं जो सपने उन्हें बतला नहीं सकता
कलेजा चीरकर अपना तुम्हे दिखला नहीं सकता
तुझे चाहा तुझे पूजा तेरी ही बन्दगी की है
किसी भी और के आगे ये सर झुका नहीं सकता
यूँ मिलती है मसर्रत जो तुम्हे ये दिल दुखाने में
कभी में दिलकिसी का ऐसे तो दुखा नहीं सकता
बसी है मेरे साँसों में महक कुछ इस कदर तेरी
छुपाना चाहूं भी तो मैं कभी छुपा नहीं सकता
न होना तुम खफा हम से कभी भी ऐ मेरे हमदम
जुदा होके में तुमसे ज़िन्दगी महका नहीं सकता
करूँ मैं कैसे तुमसे झूठे वादे हम सफर मेरे
जमी पर चाँद तारे तोड़ कर में ला नहीं सकता
( लक्ष्मण दावानी ✍ )
16/1/2017 #📚कविता-कहानी संग्रह #शायरी #💝 शायराना इश्क़ #✒ शायरी #📜मेरी कलम से✒️
12122 12122
ये दर्दे दिल बेशुमार आये
चाहत में होके शुमार आये
दिखा नहीं कोई तेरे जैसा
नज़र में मेरी हज़ार आये
मुद्दत से है आरजू मेरी भी
मेरे लिये गम गुसार आये
फिगार है तेरे चाहतो में
कभी हमें भी करार आये
इनायतें बक्श दे हमें भी
दहर में मेरी बहार आये
सुखन लिखी मैंने नाम तेरे
यूँ सुर दे अपने बयार आये
( लक्ष्मण दावानी ✍ )
15/1/2017
फिगार - घायल
दहर - दुनियाँ
सुखन - कविता #📜मेरी कलम से✒️ #✒ शायरी #💝 शायराना इश्क़ #शायरी #📚कविता-कहानी संग्रह
2122 1212 22
बिन तेरे पास अब बचा क्या है
अंधेरो के सिवा रहा क्या है
खो दिया तुझे खो के सब मैंने
ज़िन्दगी में रहा मजा क्या है
घुट रही साँसे धीरे धीरे अब
मौत के सिवा रास्ता क्या है
लुट गई खुशियां सभी मेरी
कह रहे हो तेरा मिटा क्या है
उड़ गये रंग ज़िन्द के सारे
ओ बड़ी इससे बद्दुआ क्या है
ना दवा में असर न दुआ में
रब ने भी मेरा सुना क्या है
( लक्ष्मण दावानी ✍ )
16/2/2018 #📚कविता-कहानी संग्रह #शायरी #💝 शायराना इश्क़ #✒ शायरी #📜मेरी कलम से✒️
212 212 212
राह कोई दिखा ज़िन्दगी
कुछ तरस हमपे खा ज़िन्दगी
खो दिया आँख का तारा भी
और ना अब रुला ज़िन्दगी
गाज दिल पर गिरी है अभी
शूल ना ओ चुभा ज़िन्दगी
घुट रही साँसे तन्हाई में
और ना आजमा ज़िन्दगी
अंधेरो में जियूँ कब तलक
कोई दे मशवरा ज़िन्दगी
और तो पास कुछ ना बचा
मौत से ही मिला ज़िन्दगी
ले डूबेगा मेरा गम मुझे
कर दवा या दुआ ज़िन्दगी
( लक्ष्मण दावानी ✍ )
12/2/2018 #📜मेरी कलम से✒️ #✒ शायरी #💝 शायराना इश्क़ #शायरी #📚कविता-कहानी संग्रह
122 122 122 122
जरा देख आँखों मे पानी है अपनी
दिले दर्द की भी कहानी है अपनी
रूठा ही रहा वक़्त हम से हमेशा
जली उस से ही ज़िन्दगानी है अपनी
उतरता है जो दिल मे चुप चाप मेरे
लुटाई उसी पर जवानी है अपनी
बे बस छोड़ वापस चला तो गया तू
ये जाँ अब तुझी पर लुटानी है अपनी
कलम भी मेरी रो पड़ी आज देखो
ग़ज़ल जो लिखी वो सुनानी है अपनी
खयालो में जिसकेफकत खोये है हम
यही बात उस को बतानी है अपनी
लिखे जाएंगे फिर से अफसाने अपने
कहानी जो सब से छुपानी है अपनी
( लक्ष्मण दावानी ✍ )
10/2/2018 #📚कविता-कहानी संग्रह #शायरी #💝 शायराना इश्क़ #✒ शायरी #📜मेरी कलम से✒️
221 2121 1221 212
ज़िन्दा वजूद तो है मगर राहत नहीं रही
तेरे बगैर जीने की चाहत नहीं रही
बिस्तर कि सिलवटे दे रही दास्ताने ये
नींदों कि रात में अब शिरकत नहीं रही
कर ले अंदाजे गुफ्तगू मीठेे तु जितने भी
लहजा बता रहा है मुहब्बत नहीं रही
कुछ बंदिशे थी तेरे मुहब्बत में जाने जां
अब जुल्फ की तेरे वो नेमत नहीं रही
खोये से रहते थे तेरे खाबो ख़याल में
उन ख्वाबो में जीने की आदत नहीं रही
ताउम्र को निभाने कि कस्मे जो खाई थी
उन्हें निभाने की अब जरूरत नहीं रही
( लक्ष्मण दावानी ✍ )
13/1/2017 #📜मेरी कलम से✒️ #✒ शायरी #💝 शायराना इश्क़ #शायरी #📚कविता-कहानी संग्रह
1212 1122 1212 22/112
रहे कहीं भी तु तुझपे ही ध्यान रहता है
तु दिल मे मेरे मेरी बन के जान रहता है
तेरे कदम के निशाँ मेरे दिलपे कायम है
यहाँ पे बन के तू मेरा गुमान रहता है
छुपी है आहें तबस्सुम में हिज्र की तेरे
तड़फता है दिल मगर बेजुबान रहता है
रहा जो सर पे तेरे साये की तरह हरदम
झुका हुआ वो अब आसमान रहता है
करूं में कैसे यकीं , छोड़ कर गया है तू
बसा है रूह में मेरी ये भान रहता है
( लक्ष्मण दावानी ✍ )
12/2/2018 #📚कविता-कहानी संग्रह #शायरी #💝 शायराना इश्क़ #✒ शायरी #📜मेरी कलम से✒️




![📜मेरी कलम से✒️ - ন ভুনা उन निगाहों পঙ্কলী নক্চা फूल था दिल का खिला पहली दफा दफा ப6ள हुआ था सामना जब थीयू दिल में बैचेनी छाई रहती वो सुकूँ दिल का पहली दफा 4411]][ घायल अदा उनकी मुझे कर गई तीर नज़रों पहली दफा काचला नज़रे नज़रो से मिली थी उनके जब उनमे खुदा दिखा पहली दफा था ग झील सी आँखोंमें तूफाँ था छुपा उन निगाहों में डुबा ೪ पहली दफा मुझपे कदर सुरूर 2 dol इस थावो नशा ল पहली दफा छ। गया कितने अरमां दिल के बाकी है अभी है हौसला पहली दफा जग उठा जीवन में मेरे अँधेरे छाये থ दीप पहली ख़ुशी का जला दफा ( लक्ष्मण दावानी ) ন ভুনা उन निगाहों পঙ্কলী নক্চা फूल था दिल का खिला पहली दफा दफा ப6ள हुआ था सामना जब थीयू दिल में बैचेनी छाई रहती वो सुकूँ दिल का पहली दफा 4411]][ घायल अदा उनकी मुझे कर गई तीर नज़रों पहली दफा काचला नज़रे नज़रो से मिली थी उनके जब उनमे खुदा दिखा पहली दफा था ग झील सी आँखोंमें तूफाँ था छुपा उन निगाहों में डुबा ೪ पहली दफा मुझपे कदर सुरूर 2 dol इस थावो नशा ল पहली दफा छ। गया कितने अरमां दिल के बाकी है अभी है हौसला पहली दफा जग उठा जीवन में मेरे अँधेरे छाये থ दीप पहली ख़ुशी का जला दफा ( लक्ष्मण दावानी ) - ShareChat 📜मेरी कलम से✒️ - ন ভুনা उन निगाहों পঙ্কলী নক্চা फूल था दिल का खिला पहली दफा दफा ப6ள हुआ था सामना जब थीयू दिल में बैचेनी छाई रहती वो सुकूँ दिल का पहली दफा 4411]][ घायल अदा उनकी मुझे कर गई तीर नज़रों पहली दफा काचला नज़रे नज़रो से मिली थी उनके जब उनमे खुदा दिखा पहली दफा था ग झील सी आँखोंमें तूफाँ था छुपा उन निगाहों में डुबा ೪ पहली दफा मुझपे कदर सुरूर 2 dol इस थावो नशा ল पहली दफा छ। गया कितने अरमां दिल के बाकी है अभी है हौसला पहली दफा जग उठा जीवन में मेरे अँधेरे छाये থ दीप पहली ख़ुशी का जला दफा ( लक्ष्मण दावानी ) ন ভুনা उन निगाहों পঙ্কলী নক্চা फूल था दिल का खिला पहली दफा दफा ப6ள हुआ था सामना जब थीयू दिल में बैचेनी छाई रहती वो सुकूँ दिल का पहली दफा 4411]][ घायल अदा उनकी मुझे कर गई तीर नज़रों पहली दफा काचला नज़रे नज़रो से मिली थी उनके जब उनमे खुदा दिखा पहली दफा था ग झील सी आँखोंमें तूफाँ था छुपा उन निगाहों में डुबा ೪ पहली दफा मुझपे कदर सुरूर 2 dol इस थावो नशा ল पहली दफा छ। गया कितने अरमां दिल के बाकी है अभी है हौसला पहली दफा जग उठा जीवन में मेरे अँधेरे छाये থ दीप पहली ख़ुशी का जला दफा ( लक्ष्मण दावानी ) - ShareChat](https://cdn4.sharechat.com/bd5223f_s1w/compressed_gm_40_img_474586_14c19c0f_1771720473252_sc.jpg?tenant=sc&referrer=user-profile-service%2FrequestType50&f=252_sc.jpg)








