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दोहा रहीम #संतो की रचनायें
संतो की रचनायें - दोहा कहु रहीम कैसे निभै, बेर केर को संग। वे डोलत रस आपने , उनके फाटत अंगI। भावार्थः रहीम कहते हैं कि दो विपरीत प्रवृत्ति के लोग एक साथ नहीं रह सकते। यानी दुर्जन सज्जन एक साथ नहीं रह सकते। यदि साथ रहें तो सज्जन की होती हानि है, दुर्जन का कुछ नहीं बिगड़ता| कवि ने करते हुए  எஈகிgf ೫೯T ೯f बेर और केले के पेड़ आसपास उगे हों तो उनकी संगत कैसे निभ सकती है? दोनों का अलग ्अलग स्वभाव है। बेर के पेड़ में काँटे होते हैं तो केले का पेड़ नरम होता है। हवा के झोंकों से बेर की डालियाँ मस्ती में हिलती डुलती हैं तो केले के पेड़ का अंगनअंग छिल जाता है। रहाम Want . Motivational Videos App दोहा कहु रहीम कैसे निभै, बेर केर को संग। वे डोलत रस आपने , उनके फाटत अंगI। भावार्थः रहीम कहते हैं कि दो विपरीत प्रवृत्ति के लोग एक साथ नहीं रह सकते। यानी दुर्जन सज्जन एक साथ नहीं रह सकते। यदि साथ रहें तो सज्जन की होती हानि है, दुर्जन का कुछ नहीं बिगड़ता| कवि ने करते हुए  எஈகிgf ೫೯T ೯f बेर और केले के पेड़ आसपास उगे हों तो उनकी संगत कैसे निभ सकती है? दोनों का अलग ्अलग स्वभाव है। बेर के पेड़ में काँटे होते हैं तो केले का पेड़ नरम होता है। हवा के झोंकों से बेर की डालियाँ मस्ती में हिलती डुलती हैं तो केले के पेड़ का अंगनअंग छिल जाता है। रहाम Want . Motivational Videos App - ShareChat