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शेर गालिब #✒ शायरी
✒ शायरी - %   % % "न था कुछ तो ख़ुदा था, कुछ न होता तो ख़ुदा होता। होने ने, न होता मैं तो डुबोया मुझको क्या होता। भावार्थः जब कुछ नहीं था, तब भी खुदा था; अगर कुछ न होता, तो खुदा होता। अस्तित्व में आने ने मुझे डुबो दिया, मैं न होता तो क्या होता 3TR (अस्तित्व के विरोधाभास पर). (गालिब) App Want Motivational Videos  %   % % "न था कुछ तो ख़ुदा था, कुछ न होता तो ख़ुदा होता। होने ने, न होता मैं तो डुबोया मुझको क्या होता। भावार्थः जब कुछ नहीं था, तब भी खुदा था; अगर कुछ न होता, तो खुदा होता। अस्तित्व में आने ने मुझे डुबो दिया, मैं न होता तो क्या होता 3TR (अस्तित्व के विरोधाभास पर). (गालिब) App Want Motivational Videos - ShareChat