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जय श्री राम - काहु न कोउ सुख दुख कर दाता। निज कृत करम भोग सबु भ्राता।I किसी को सुख या दुख नहीं देता। सब अपने ही कर्मो का फल भोगते हैं।l  कोई व्याख्याः इस चौपाई में तुलसीदास जी कहते हैं कि संसार में कोई भी व्यक्ति किसी दूसरे के सुख या दुख का कारण नहीं होता। हर प्राणी अपने ही पिछले कर्मो के अनसार फल (सख या दख) प्राप्त करता है। काहु न कोउ सुख दुख कर दाता। निज कृत करम भोग सबु भ्राता।I किसी को सुख या दुख नहीं देता। सब अपने ही कर्मो का फल भोगते हैं।l  कोई व्याख्याः इस चौपाई में तुलसीदास जी कहते हैं कि संसार में कोई भी व्यक्ति किसी दूसरे के सुख या दुख का कारण नहीं होता। हर प्राणी अपने ही पिछले कर्मो के अनसार फल (सख या दख) प्राप्त करता है। - ShareChat