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#🙏गीता ज्ञान🛕 🦚🦚🪷🪷🦚🦚🪷🪷🦚🦚 सुप्रभातम् देवद्विजगुरुप्राज्ञ-पूजनं शौचमार्जवम्। ब्रह्मचर्यमहिंसा च शारीरं तप उच्यते।। (श्रीमद्भगवद्गीता) 🚩 अर्थात 👉 देवता, ब्राह्मण (विद्वान) गुरु और माता-पिता जैसे ज्ञानियों का आदर-पूजन करना, बाहर और भीतर (शरीर और आचरण) की शुद्धि रखना, स्वभाव और व्यवहार में सरलता रखना, अपनी इंद्रियों पर नियंत्रण रखना और वासनाओं से दूर रहना, किसी भी जीव को मन, वचन या कर्म से कष्ट न पहुँचाना - इन सभी क्रियाओं को शरीर द्वारा किया जाने वाला 'तप' कहा जाता है। जय श्री कृष्ण 🦚🦚🪷🪷🦚🦚🪷🪷🦚🦚
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