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#मेरी कविता #📚कविता-कहानी संग्रह
मेरी कविता - रंग बदलती दुनिया  रंग बदलती दुनिया में माहिर हम ना थे मखोल उड़ाते परिंदों की उड़ान हम ना थे जो चेहरे पर लपेट लेते हें कई चेहरे यहाँ उस अदाकारी के कतई तरफदार हम ना थे वो नापते रहे हमारी सादगी को अपनी चालाकी से उनके तराज़ू में तोले जाएँ वो सामान हम ना थे गिरेबाँ सा़फ रखा और ज़ुबाँ को नर्म ही रखा किसी के दिल को दुखा दें वो तूफान हम ना थे खामोशी को हमारी जो उन्होंने कमज़ोरी समझ लिया बेवजह जो बरस जाए वो बादल हम ना थे TR हुआ कि हम दुनिया की दौड़ में पीछे रहे चलो अच्छा जो खुद को खोकर जीते वो इंसान हम ना थे स्वाती छीपा रंग बदलती दुनिया  रंग बदलती दुनिया में माहिर हम ना थे मखोल उड़ाते परिंदों की उड़ान हम ना थे जो चेहरे पर लपेट लेते हें कई चेहरे यहाँ उस अदाकारी के कतई तरफदार हम ना थे वो नापते रहे हमारी सादगी को अपनी चालाकी से उनके तराज़ू में तोले जाएँ वो सामान हम ना थे गिरेबाँ सा़फ रखा और ज़ुबाँ को नर्म ही रखा किसी के दिल को दुखा दें वो तूफान हम ना थे खामोशी को हमारी जो उन्होंने कमज़ोरी समझ लिया बेवजह जो बरस जाए वो बादल हम ना थे TR हुआ कि हम दुनिया की दौड़ में पीछे रहे चलो अच्छा जो खुद को खोकर जीते वो इंसान हम ना थे स्वाती छीपा - ShareChat