• 168 shares
More like this
- Media House(Ranupriya)#इस_सोमवार 'विधायक रोहित' क्षेत्रके अनेक आयोजनों में लेंगे भाग #monday #Jalabhishek #lokarpan #shivmahapuran #kalchakra365 #pravindewangan #ranupriya #राजिम_विधायक #cg #explorar #chhattisgarh #fingeshwar #rajimvidhansabha #🇮🇳स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं 🇮🇳💙 #🇮🇳🇮🇳🇮🇳स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं।🇮🇳🇮🇳🇮🇳 #जलाभिषेक #शिव महापुराण🙏 #🕉 ओम नमः शिवाय 🔱79
- JP GAUR#कलश #यात्रा #शिव #श्री शिव महापुराण कथा #शिव महापुराण🙏169
- sn vyas🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸 ---*⚜*--- *दीपप्रिय: कार्तवीर्यो मार्तण्डो नतिवल्लभ: ।* *स्तुतिप्रियो महाविष्णुर्गगणेशस्ततर्पणप्रियः* *दुर्गाऽर्चनप्रिया नूनमभिषेकप्रियः शिवः ।* *तस्मात्तेषां प्रतोषाय विदध्यात्तत्तदादृतः ।।* मन्त्रमहोदधि २७/११६-११७ "कार्तवीर्य को दीप प्रिय है, सूर्य को नमस्कार प्रिय है, विष्णुजी को स्तुति प्रिय है, गणेशजी को तर्पण प्रिय है,दुर्गाजी को अर्चना प्रिय है और *शिवजी को अभिषेक प्रिय है ।* अतः इन देवताओ को प्रसन्न करने के लिये इनके प्रिय कार्य ही करने चाहिये।" ---*⚜*--- *विना भस्मत्रिपुंड्रेण विना रुद्राक्षमालया ।* *बिल्वपत्रं विना नैव पूजयेच्छंकरं बुधः ।।* *भस्माप्राप्तौ मुनिश्रेष्ठाः प्रवृत्ते शिवपूजने।* *तस्मान्मृदापि कर्तव्यं ललाटे च त्रिपुंड्रकम् ।।* शिवपुराण, वि० २१/५५,५६ ‘‘विद्वान पुरूष को चाहिये की बिना भस्म का त्रिपुण्ड्र लगाये, बिना रूद्राक्ष की माला धारण किये तथा बिल्वपत्र का बिना संग्रह किये भगवान शंकर की पूजा न करे । शिवपूजन आरम्भ करते समय यदि भस्म न मिल, तो मिट्टी से ही ललाट में त्रिपुण्ड्र अवश्य कर लेना चाहिये।‘‘ ---*⚜*--- 🙏 *जय मातादी* 🙏 🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸 #शिव महापुराण🙏 #श्री शिव महापुराण कथा #प्रदीप मिश्रा द्वारा शिव महापुराण कथा #🌺श्री शिवाय नमस्तुभ्यं 🙏शिव पुराण पं प्रदीप मिश्रा जी #शिव पुराण 🌺2010
- sn vyas*यह कथा शिव पुराण के उमा संहिता तथा रुद्र संहिता में वर्णित है, जो महर्षि वशिष्ठ और राजर्षि विश्वामित्र के मध्य के प्रसिद्ध मतभेद, विश्वामित्र की घोर तपस्या और अंततः भगवान शिव की कृपा से उन्हें प्राप्त 'ब्रह्मर्षि' पद की गाथा है।* *1. कामधेनु नंदिनी को लेकर विवाद* *प्रारंभ में विश्वामित्र एक प्रतापी और शक्तिशाली राजा थे। एक बार वे अपनी सेना के साथ महर्षि वशिष्ठ के आश्रम में पहुँचे। महर्षि वशिष्ठ ने अपनी अलौकिक कामधेनु गाय (नंदिनी) की सहायता से राजा विश्वामित्र और उनकी विशाल सेना का अभूतपूर्व आदर-सत्कार किया।* *नंदिनी की सामर्थ्य देखकर राजा विश्वामित्र के मन में लोभ आ गया। उन्होंने वशिष्ठ जी से नंदिनी को माँगना चाहा, परंतु वशिष्ठ जी ने कहा कि गौ माता आश्रम की संपत्ति नहीं, बल्कि पूजनीय है। इस पर विश्वामित्र ने बलपूर्वक नंदिनी को ले जाने का प्रयास किया, किंतु नंदिनी के दिव्य तेज और वशिष्ठ जी के ब्रह्मबल के आगे विश्वामित्र की संपूर्ण सेना पराजित हो गई।* *2. 'क्षत्रिय बल' पर 'ब्रह्मबल' की विजय* *अपनी पराजय से दुःखी होकर विश्वामित्र को बोध हुआ कि शारीरिक और सैन्य बल (क्षत्रिय बल) आत्मबल और तपोबल (ब्रह्मबल) के सामने अत्यंत तुच्छ है।* *उन्होंने विचार किया:* *"धिक्कार है क्षत्रिय बल को! असली बल तो ब्रह्मबल है। मैं भी घोर तपस्या करके ब्रह्मर्षि पद प्राप्त करूँगा।"* *3. भगवान शिव की घोर तपस्या* *विश्वामित्र ने अपना राज-पाट त्याग दिया और भगवान शिव की प्रसन्नता के लिए कठोर तपस्या प्रारंभ की। उन्होंने वर्षों तक निराहार रहकर महादेव का ध्यान किया।* *उनकी निष्ठा और उग्र तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव उनके समक्ष प्रकट हुए। विश्वामित्र ने भगवान शिव से दिव्य अस्त्र-शस्त्रों और वेदों के गूढ़ ज्ञान का वरदान माँगा। शिवजी ने उन्हें समस्त दिव्यास्त्र प्रदान किए।* *दिव्यास्त्र प्राप्त करने के अहंकार में विश्वामित्र ने पुनः महर्षि वशिष्ठ पर आक्रमण कर दिया। परंतु महर्षि वशिष्ठ ने अपने 'ब्रह्मदंड' से विश्वामित्र के सभी अस्त्रों को निष्फल कर दिया। विश्वामित्र को समझ आ गया कि केवल अस्त्र-शस्त्र प्राप्त कर लेने से कोई 'ब्रह्मर्षि' नहीं बनता, जब तक कि मन से क्रोध, अहंकार और ईर्ष्या का नाश न हो जाए।* *4. अहंकार का त्याग और शिव कृपा से 'ब्रह्मर्षि' पद* *विश्वामित्र पुनः भगवान शिव की शरण में गए। इस बार उन्होंने किसी अस्त्र या पद की लालसा के बिना केवल* *आत्म-शुद्धि और शिव-भक्ति के लिए तपस्या की। धीरे-धीरे उनके मन से अहंकार, क्रोध और वशिष्ठ जी के प्रति ईर्ष्या पूरी तरह समाप्त हो गई।* *जब विश्वामित्र का हृदय पूर्णतः निर्मल हो गया, तब भगवान शिव ने प्रकट होकर उन्हें आशीर्वाद दिया और स्वयं महर्षि वशिष्ठ ने आगे बढ़कर विश्वामित्र को गले लगाया तथा उन्हें 'ब्रह्मर्षि' स्वीकार किया।* *कथा का संदेश: सच्चा ज्ञान और उच्च पद बल या छल से नहीं, बल्कि अहंकार के त्याग, नम्रता और भगवान शिव की निष्काम भक्ति से ही प्राप्त होता है।* #🪔सावन का पवित्र महीना 🙏 #🕉 ओम नमः शिवाय 🔱 #🔱हर हर महादेव #शिव महापुराण🙏 #श्री शिव महापुराण कथा1414
- जय श्री सांवलिया सेठ#प्रदीप मिश्रा द्वारा शिव महापुराण कथा #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏गुरु महिमा😇 #har har mahade# #शिव महापुराण🙏5176
- जय श्री सांवलिया सेठ#शिव महापुराण🙏 #प्रदीप मिश्रा द्वारा शिव महापुराण कथा #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏गुरु महिमा😇 #har har mahade#7151K
- जय श्री सांवलिया सेठ#प्रदीप मिश्रा द्वारा शिव महापुराण कथा #🙏गुरु महिमा😇 #शिव महापुराण🙏 #❤️Love You ज़िंदगी ❤️ #har har mahade#1542
- जय श्री सांवलिया सेठ#❤️Love You ज़िंदगी ❤️ #🛕मंदिर दर्शन🙏 #🙏 भजन संग्रह 🎵 #शिव महापुराण🙏 #प्रदीप मिश्रा द्वारा शिव महापुराण कथा328568
- जय श्री सांवलिया सेठ#प्रदीप मिश्रा द्वारा शिव महापुराण कथा #शिव महापुराण🙏 #har har mahade# #जय श्री रघुनंदन । जय श्री सीताराम 🙏 #जय सियाराम2157