sn vyas
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*दीपप्रिय: कार्तवीर्यो मार्तण्डो नतिवल्लभ: ।*
*स्तुतिप्रियो महाविष्णुर्गगणेशस्ततर्पणप्रियः*
*दुर्गाऽर्चनप्रिया नूनमभिषेकप्रियः शिवः ।*
*तस्मात्तेषां प्रतोषाय विदध्यात्तत्तदादृतः ।।*
मन्त्रमहोदधि २७/११६-११७
"कार्तवीर्य को दीप प्रिय है, सूर्य को नमस्कार प्रिय है, विष्णुजी को स्तुति प्रिय है, गणेशजी को तर्पण प्रिय है,दुर्गाजी को अर्चना प्रिय है और *शिवजी को अभिषेक प्रिय है ।* अतः इन देवताओ को प्रसन्न करने के लिये इनके प्रिय कार्य ही करने चाहिये।"
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*विना भस्मत्रिपुंड्रेण विना रुद्राक्षमालया ।*
*बिल्वपत्रं विना नैव पूजयेच्छंकरं बुधः ।।*
*भस्माप्राप्तौ मुनिश्रेष्ठाः प्रवृत्ते शिवपूजने।*
*तस्मान्मृदापि कर्तव्यं ललाटे च त्रिपुंड्रकम् ।।*
शिवपुराण, वि० २१/५५,५६
‘‘विद्वान पुरूष को चाहिये की बिना भस्म का त्रिपुण्ड्र लगाये, बिना रूद्राक्ष की माला धारण किये तथा बिल्वपत्र का बिना संग्रह किये भगवान शंकर की पूजा न करे । शिवपूजन आरम्भ करते समय यदि भस्म न मिल, तो मिट्टी से ही ललाट में त्रिपुण्ड्र अवश्य कर लेना चाहिये।‘‘
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🙏 *जय मातादी* 🙏
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#शिव महापुराण🙏 #श्री शिव महापुराण कथा #प्रदीप मिश्रा द्वारा शिव महापुराण कथा #🌺श्री शिवाय नमस्तुभ्यं 🙏शिव पुराण पं प्रदीप मिश्रा जी #शिव पुराण 🌺
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