💥❤️🔥Asha🦋Kushwah❤️🔥💥
834 views • 2 days ago
शीतला अष्टमी की कहानी
शीतला अष्टमी (जिसे 'बसौड़ा' भी कहा जाता है) पर माता शीतला को प्रसन्न करने और बीमारियों से रक्षा के लिए व्रत रखा जाता है। इस दिन घरों में चूल्हा नहीं जलता और माता को बासी (ठंडे) भोजन का भोग लगाया जाता है।शीतला अष्टमी की पौराणिक व्रत कथाएक गाँव में एक ब्राह्मण परिवार रहता था, जिसमें सास और दो बहुएं थीं। शीतला अष्टमी के दिन सभी को नियम के अनुसार ठंडा भोजन करना था, लेकिन दोनों बहुओं को लगा कि ठंडा खाना खाने से वे बीमार पड़ सकती हैं और उनके बच्चे भी छोटे हैं। इसलिए, उन्होंने चुपके से पशुओं का चारा पकाने वाले बर्तन में अपने लिए गरम खाना बना लिया।बाद में जब सास शीतला माता की पूजा करके घर लौटी, तो बहुओं ने भी माता की कथा सुनी। कथा सुनने के बाद, जब बहुएं अपने बच्चों को उठाने गईं, तो उनके होश उड़ गए। शीतला माता के प्रकोप से उनके दोनों बच्चों की साँसे रुक चुकी थीं।यह देख सास रोने-बिलखने लगी और बहुओं से इसका कारण पूछा। बहुओं ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए सारी सच्चाई बता दी। सास ने उन्हें माता की शरण में जाने को कहा। बहुएं अपने बच्चों को लेकर उसी अवस्था में पैदल ही शीतला माता को खोजने निकल पड़ीं।रास्ते में उन्हें एक स्थान पर दो बहनें (माता शीतला के रूप में) मिलीं, जो अपने बालों में जूँ से बहुत परेशान थीं। दोनों बहुओं ने श्रद्धापूर्वक उन महिलाओं के बाल साफ किए और उन्हें ठंडक पहुँचाई। महिलाओं ने प्रसन्न होकर बहुओं को उनके बच्चों को वापस जीवित करने का आशीर्वाद दिया।जब बहुओं ने मुड़कर देखा, तो उनके बच्चे जीवित हो चुके। माता रानी का आशीर्वाद सभी पर बना रहे यही प्रार्थना है।🙏🏻 #🌹शुभ शीतला अष्टमी🌹 #🌺शीतला अष्टमी👐 #शीतला अष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं #शीतला अष्टमी
21 likes
1 comment • 11 shares