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#महाभारत #श्रीमहाभारतकथा-3️⃣6️⃣1️⃣ श्रीमहाभारतम् 〰️〰️🌼〰️〰️ ।। श्रीहरिः ।। * श्रीगणेशाय नमः * ।। श्रीवेदव्यासाय नमः ।। (सम्भवपर्व) द्वाविंशत्यधिकशततमोऽध्यायः युधिष्ठिर, भीम और अर्जुन की उत्पत्ति...(दिन 361) 〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️ समवेत्य च देवानां गणाः पार्थमपूजयन् । काद्रवेया वैनतेया गन्धर्वाप्सरसस्तथा । प्रजानां पतयः सर्वे सप्त चैव महर्षयः ।। ५० ।। भरद्वाजः कश्यपो गौतमश्च विश्वामित्रो जमदग्निर्वसिष्ठः । यश्चोदितो भास्करेऽभूत् प्रणष्टे सोऽप्यत्रात्रिर्भगवानाजगाम ।। ५१ ।। फिर झुंड-के-झुंड देवता वहाँ एकत्र होकर अर्जुनकी प्रशंसा करने लगे। कद्रूके पुत्र (नाग), विनताके पुत्र (गरुड पक्षी), गन्धर्व, अप्सराएँ, प्रजापति, सप्तर्षिगण-भरद्वाज, कश्यप, गौतम, विश्वामित्र, जमदग्नि, वसिष्ठ तथा जो नक्षत्रके रूपमें सूर्यास्त होनेके पश्चात् उदित होते हैं, वे भगवान् अत्रि भी वहाँ आये ।। ५०-५१ ।। मरीचिरङ्गिराश्चैव पुलस्त्यः पुलहः क्रतुः । दक्षः प्रजापतिश्चैव गन्धर्वाप्सरसस्तथा ।। ५२ ।। मरीचि और अंगिरा, पुलस्त्य, पुलह, क्रतु एवं प्रजापति दक्ष, गन्धर्व तथा अप्सराएँ भी आयीं ।। ५२ ।। दिव्यमाल्याम्बरधराः सर्वालंकारभूषिताः । उपगायन्ति बीभत्सुं नृत्यन्तेऽप्सरसां गणाः ।। ५३ ।। उन सबने दिव्य हार और दिव्य वस्त्र धारण कर रखे थे। वे सब प्रकारके आभूषणोंसे विभूषित थे। अप्सराओंका पूरा दल वहाँ जुट गया था। वे सभी अर्जुनके गुण गाने और नृत्य करने लगीं ।। ५३ ।। तथा महर्षयश्चापि जेपुस्तत्र समन्ततः । गन्धर्वैः सहितः श्रीमान् प्रागायत च तुम्बुरुः ।। ५४ ।। महर्षि भी वहाँ सब ओर खड़े होकर मांगलिक मन्त्रोंका जप करने लगे। गन्धर्वोके साथ श्रीमान् तुम्बुरुने मधुर स्वरसे गीत गाना प्रारम्भ किया ।। ५४ ।। भीमसेनोग्रसेनौ च ऊर्णायुरनघस्तथा । गोपतिधृतराष्ट्रश्च सूर्यवर्चास्तथाष्टमः ।। ५५ ।। युगपस्तृणपः काष्णैिर्नन्दिश्चित्ररथस्तथा । त्रयोदशः शालिशिराः पर्जन्यश्च चतुर्दशः ।। ५६ ।। कलिः पञ्चदशश्चैव नारदश्चात्र षोडशः । ऋत्वा बृहत्त्वा बृहकः करालश्च महामनाः ।। ५७ ।। ब्रह्मचारी बहुगुणः सुवर्णश्चेति विश्रुतः । विश्वावसुर्भुमन्युश्च सुचन्द्रश्च शरुस्तथा ।। ५८ ।। गीतमाधुर्यसम्पन्नौ विख्यातौ च हहाहुहू । इत्येते देवगन्धर्वा जग्मुस्तत्र नराधिप ।। ५९ ।। भीमसेन तथा उग्रसेन, ऊर्णायु और अनघ, गोपति एवं धृतराष्ट्र, सूर्यवर्चा तथा आठवें युगप, तृणप, काष्र्ष्याि, नन्दि एवं चित्ररथ, तेरहवें शालिशिरा और चौदहवें पर्जन्य, पंद्रहवें कलि और सोलहवें नारद, ऋत्वा और बृहत्त्वा, बृहक एवं महामना कराल, ब्रह्मचारी तथा विख्यात गुणवान् सुवर्ण, विश्वावसु एवं भुमन्यु, सुचन्द्र और शरु तथा गीतमाधुर्यसे सम्पन्न सुविख्यात हाहा और हूहू-राजन् ! ये सब देवगन्धर्व वहाँ पधारे थे ।। ५५-५९ ।। तथैवाप्सरसो हृष्टाः सर्वालंकारभूषिताः । ननृतुर्वै महाभागा जगुश्चायतलोचनाः ।। ६० ।। इसी प्रकार समस्त आभूषणोंसे विभूषित बड़े-बड़े नेत्रोंवाली परम सौभाग्यशालिनी अप्सराएँ भी हर्षोल्लासमें भरकर वहाँ नृत्य करने लगीं ।। ६० ।। अनूचानानवद्या च गुणमुख्या गुणावरा । अद्रिका च तथा सोमा मिश्रकेशी त्वलम्बुषा ।। ६१ ।। मरीचिः शुचिका चैव विद्युत्पर्णा तिलोत्तमा । अम्बिका लक्षणा क्षेमा देवी रम्भा मनोरमा ।। ६२ ।। असिता च सुबाहुश्च सुप्रिया च वपुस्तथा। पुण्डरीका सुगन्धा च सुरसा च प्रमाथिनी ।। ६३ ।। काम्या शारद्वती चैव ननृतुस्तत्र सङ्घशः। मेनका सहजन्या च कर्णिका पुञ्जिकस्थला ।। ६४ ।। ऋतुस्थला घृताची च विश्वाची पूर्वचित्त्यपि । उम्लोचेति च विख्याता प्रम्लोचेति च ता दश ।। ६५ ।। उनके नाम इस प्रकार हैं- अनूचाना और अनवद्या, गुणमुख्या एवं गुणावरा, अद्रिका तथा सोमा, मिश्रकेशी और अलम्बुषा, मरीचि और शुचिका, विद्युत्पर्णा, तिलोत्तमा, अम्बिका, लक्षणा, क्षेमा, देवी, रम्भा, मनोरमा, असिता और सुबाहु, सुप्रिया एवं वपु, पुण्डरीका एवं सुगन्धा, सुरसा और प्रमाथिनी, काम्या तथा शारद्वती आदि। ये झुंड-की-झुंड अप्सराएँ नाचने लगीं। इनमें मेनका, सहजन्या, कर्णिका और पुंजिकस्थला, ऋतुस्थला एवं घृताची, विश्वाची और पूर्वचित्ति, उम्लोचा और प्रम्लोचा-ये दस विख्यात हैं ।। ६१-६५ ।। उर्वश्येकादशी तासां जगुश्चायतलोचनाः । धातार्यमा च मित्रश्च वरुणोंऽशो भगस्तथा ।। ६६ ।। इन्द्रो विवस्वान् पूषा च त्वष्टा च सविता तथा । पर्जन्यश्चैव विष्णुश्च आदित्या द्वादश स्मृताः । महिमानं पाण्डवस्य वर्धयन्तोऽम्बरे स्थिताः ।। ६७ ।। इन्हीं प्रधान अप्सराओंकी श्रेणीमें ग्यारहवीं उर्वशी है। ये सभी विशाल नेत्रोंवाली सुन्दरियाँ वहाँ गीत गाने लगीं। धाता और अर्थमा, मित्र और वरुण, अंश एवं भग, इन्द्र, विवस्वान् और पूषा, त्वष्टा एवं सविता, पर्जन्य तथा विष्णु- ये बारह आदित्य माने गये हैं। ये सभी पाण्डुनन्दन अर्जुनका महत्त्व बढ़ाते हुए आकाशमें खड़े थे ।। ६६-६७ ।। क्रमशः... साभार~ पं देव शर्मा🔥 〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️
महाभारत - প্রীসভাপ্সানদূ প্রীসভাপ্সানদূ - ShareChat