🕉️ raj kumar🕉️
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✨✨सुप्रभात✨✨
🌳🦚आज की कहानी🦚🌳
💐💐विचारों की शक्ति – जैसा सोचोगे वैसा पाओगे💐💐
एक समय की बात है, एक राजा अपने हाथी पर सवार होकर अपने राज्य का भ्रमण कर रहा था। वह प्रजा का हालचाल जानने और राज्य की व्यवस्था देखने के लिए समय-समय पर इस प्रकार का दौरा किया करता था। चलते-चलते अचानक उसकी दृष्टि एक छोटी-सी दुकान पर पड़ी। वह तुरंत रुक गया और अपने मंत्री से बोला, “मुझे नहीं पता क्यों, लेकिन इस दुकान के मालिक को देखकर मेरे मन में उसे फाँसी देने का विचार आ रहा है।” राजा की यह बात सुनकर मंत्री अत्यंत चकित और दुखी हुआ, क्योंकि राजा स्वभाव से न्यायप्रिय और दयालु था। बिना किसी कारण किसी को दंड देने की बात करना उसके स्वभाव के विपरीत था। मंत्री उस समय कुछ पूछ नहीं पाया और राजा आगे बढ़ गया, लेकिन उसके मन में यह बात घर कर गई।
अगले ही दिन मंत्री ने सच्चाई जानने का निश्चय किया। वह साधारण नागरिक का वेश धारण करके उस दुकान पर पहुँचा। उसने दुकानदार से सामान्य बातचीत शुरू की और पूछा, “भाई, तुम्हारा व्यापार कैसा चल रहा है?” दुकानदार ने गहरी साँस लेते हुए कहा, “क्या बताऊँ साहब, मेरा व्यापार बहुत खराब चल रहा है। मैं चंदन की लकड़ी बेचता हूँ। लोग आते हैं, चंदन की खुशबू सूँघते हैं, उसकी प्रशंसा करते हैं, लेकिन खरीदकर कोई नहीं ले जाता। कभी-कभी तो लगता है कि यह व्यापार ही छोड़ दूँ।”
कुछ देर बाद दुकानदार ने अपने मन की छिपी हुई बात भी कह दी। वह बोला, “अब तो मेरी आशा केवल इस बात पर टिकी है कि राजा की मृत्यु जल्दी हो जाए। जब उनकी अन्त्येष्टि होगी, तब बहुत सारा चंदन खरीदा जाएगा। इस क्षेत्र में मैं अकेला चंदन व्यापारी हूँ, इसलिए मुझे बड़ा लाभ होगा।” यह सुनते ही मंत्री सब समझ गया। उसे यह स्पष्ट हो गया कि दुकानदार के मन में राजा के प्रति नकारात्मक विचार भरे हुए हैं और शायद इन्हीं विचारों की तरंगों का प्रभाव राजा के मन पर पड़ा था, जिससे उसके मन में भी दुकानदार के प्रति कठोर विचार उत्पन्न हुए।
मंत्री बुद्धिमान था। उसने स्थिति को सुधारने का उपाय सोचा। उसने दुकानदार से कुछ चंदन की लकड़ी खरीद ली। दुकानदार बहुत प्रसन्न हुआ और उसने बड़ी श्रद्धा से चंदन को अच्छी तरह पैक करके मंत्री को दे दिया। मंत्री उस चंदन को लेकर महल पहुँचा और राजा से कहा, “महाराज, चंदन के व्यापारी ने आपके लिए यह भेंट भेजी है।” यह सुनकर राजा को आश्चर्य हुआ। जब उसने चंदन का पैकेट खोला, तो उसकी सुगंध से पूरा कक्ष महक उठा। चंदन की उत्तम गुणवत्ता देखकर राजा बहुत प्रसन्न हुआ और उसने व्यापारी के लिए सोने के कुछ सिक्के भिजवाने का आदेश दिया।
जब दुकानदार को राजा की ओर से सोने के सिक्के मिले, तो वह आश्चर्यचकित रह गया। उसके मन में राजा के प्रति सम्मान और कृतज्ञता भर गई। वह राजा के गुण गाने लगा और सोचने लगा कि वह कितनी बड़ी भूल कर रहा था, जो अपने स्वार्थ के कारण राजा की मृत्यु की कामना करता था। उसे अपने बुरे विचारों पर गहरा पश्चात्ताप हुआ और उसने निश्चय किया कि आगे से वह हमेशा सबके लिए शुभ और सकारात्मक विचार ही रखेगा।
इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमारे विचार ही हमारे कर्मों की जड़ होते हैं। यदि हम दूसरों के प्रति अच्छे, दयालु और सकारात्मक विचार रखेंगे, तो वही सकारात्मकता किसी न किसी रूप में हमारे पास लौटकर आएगी। लेकिन यदि हम मन में बुरे और नकारात्मक विचार पालेंगे, तो उनका परिणाम भी नकारात्मक ही होगा।
जय जय श्री राम 🙏🏻
जय हिन्द 🇮🇳
सदैव प्रसन्न रहिए 🙏🏻
जो प्राप्त है, पर्याप्त है।।
।।राम_राम।।
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