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#📝कविता / शायरी/ चारोळी
📝कविता / शायरी/ चारोळी - कम और अरमान बहुत हैं खुशियाँ जिसे भी देखो परेशान बहुत है | करीब से देखा तो निकला रेत का घर मगर दूर से इसकी शान बहुत है | कहते हैं सच का कोई मुकाबला नहीं, मगर आज झूठ की पहचान बहुत है | मुश्किल से मिलता है शहर में आदमी, यूँ तो कहने को इन्सान बहुत है कम और अरमान बहुत हैं खुशियाँ जिसे भी देखो परेशान बहुत है | करीब से देखा तो निकला रेत का घर मगर दूर से इसकी शान बहुत है | कहते हैं सच का कोई मुकाबला नहीं, मगर आज झूठ की पहचान बहुत है | मुश्किल से मिलता है शहर में आदमी, यूँ तो कहने को इन्सान बहुत है - ShareChat