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#📝कविता / शायरी/ चारोळी
📝कविता / शायरी/ चारोळी - तेरी आंखों की खामोशी कुछ कहती हैं तु लम्हा लम्हा मुझमें क्यूं धड़कती है तेरी होंठों पर नमी सी अब क्यूं रहती है मेरी सांसों में, तेरी सांसे ही क्यूं घुलती है तेरे दिल में दुनिया मुक्कमल सी लगती है से दिल में दिल में क्यूं उतरती है तु आंखों तू॰तेरे मेरे इस हाल को मोहब्बत कहती हैं ये धड़कन भी क्यूं तुझको अपना कहतीं हैं तेरे नाम से हर सुबह क्यूं मुस्कुराती है हर शाम तेरी यादों में क्यूं सिमट जाती है तेरे बिन अब रूह भी m೯ अधूरी सी तुझे सोचूं तो जिंदगी भी जिंदगी बन जाती है तेरी आंखों की खामोशी कुछ कहती हैं तु लम्हा लम्हा मुझमें क्यूं धड़कती है तेरी होंठों पर नमी सी अब क्यूं रहती है मेरी सांसों में, तेरी सांसे ही क्यूं घुलती है तेरे दिल में दुनिया मुक्कमल सी लगती है से दिल में दिल में क्यूं उतरती है तु आंखों तू॰तेरे मेरे इस हाल को मोहब्बत कहती हैं ये धड़कन भी क्यूं तुझको अपना कहतीं हैं तेरे नाम से हर सुबह क्यूं मुस्कुराती है हर शाम तेरी यादों में क्यूं सिमट जाती है तेरे बिन अब रूह भी m೯ अधूरी सी तुझे सोचूं तो जिंदगी भी जिंदगी बन जाती है - ShareChat
#📝कविता / शायरी/ चारोळी
📝कविता / शायरी/ चारोळी - बीमारी इक काम तो अच्छा कर देती है यारों को कुछ देर इकट्ठा कर देती है हर सूरत से मरने का दिन ख़ास है लेकिन मौत इसे भी आम तमाशा कर देती है रंग भरो अपने हिस्से के और मर जाओ दीमक हर तस्वीर को पूरा कर देती है एक कदम दहलीज़ के बाहर रखता हूँ मैं और हवा रफ़्तार ज़्यादा कर देती है मुद्दत से शाम ढले ही याद R इक आ जाती है और सवेरा कर देती है मोहब्बत जितनी वो करता है इतनी मुझसे इतनी मोहब्बत मुश्किल पैदा कर देती है इश्क़ करो आराम नहीं आए तो कहना ये बीमारी सब को अच्छा कर देती है रूठे तो इक लफ़्ज़ नहीं कहती है मुँह से बस खाने में नमक ज़्यादा कर देती है! ! बीमारी इक काम तो अच्छा कर देती है यारों को कुछ देर इकट्ठा कर देती है हर सूरत से मरने का दिन ख़ास है लेकिन मौत इसे भी आम तमाशा कर देती है रंग भरो अपने हिस्से के और मर जाओ दीमक हर तस्वीर को पूरा कर देती है एक कदम दहलीज़ के बाहर रखता हूँ मैं और हवा रफ़्तार ज़्यादा कर देती है मुद्दत से शाम ढले ही याद R इक आ जाती है और सवेरा कर देती है मोहब्बत जितनी वो करता है इतनी मुझसे इतनी मोहब्बत मुश्किल पैदा कर देती है इश्क़ करो आराम नहीं आए तो कहना ये बीमारी सब को अच्छा कर देती है रूठे तो इक लफ़्ज़ नहीं कहती है मुँह से बस खाने में नमक ज़्यादा कर देती है! ! - ShareChat
#📝कविता / शायरी/ चारोळी
📝कविता / शायरी/ चारोळी - '29-03-2026 अब दर्द सेडर नहीं लगताः क्योंकि आदत हो गई है॰ हर बार टूटना , हर बार संभलना ೦  अब ये सब जिंदगी का हिस्सा बन गया है॰ নম দক্ক হননা & कि अब किसी से उम्मीद नहीं रखते. क्योंकि उम्मीद ही सबसे ज्यादा तोड़ती है॰ अब अगर रोभी पड़ें तो खुद ही चुप होजाते हैं॰ हैज़न्दगीः क्योंकि सच यही रुलाया ना कर ऐ हमे मनाने वाला कोई नहीं '29-03-2026 अब दर्द सेडर नहीं लगताः क्योंकि आदत हो गई है॰ हर बार टूटना , हर बार संभलना ೦  अब ये सब जिंदगी का हिस्सा बन गया है॰ নম দক্ক হননা & कि अब किसी से उम्मीद नहीं रखते. क्योंकि उम्मीद ही सबसे ज्यादा तोड़ती है॰ अब अगर रोभी पड़ें तो खुद ही चुप होजाते हैं॰ हैज़न्दगीः क्योंकि सच यही रुलाया ना कर ऐ हमे मनाने वाला कोई नहीं - ShareChat
#📝कविता / शायरी/ चारोळी
📝कविता / शायरी/ चारोळी - एक रात, एक बात लिखूँगी. हर कोई पढ़ सके, इतना सा़फ़ लिखूँगी. कोई जज़्बात नहीं, अपने ही अरमान लिखूँगी. हसीन एनआलम नहीं, अपने ही हालात लिखूँगी. बहुत शिकायत है हमें ऐ तुझसे जिंदगी. अब तेरे बारे में भी एक किताब लिखूँगी. लिखते लिखते ख़त्म न हो जाए ये जिंदगी , एक ही शब्द में कायनात लिखूँगी. पूरी एक रात, एक बात लिखूँगी. हर कोई पढ़ सके, इतना सा़फ़ लिखूँगी. कोई जज़्बात नहीं, अपने ही अरमान लिखूँगी. हसीन एनआलम नहीं, अपने ही हालात लिखूँगी. बहुत शिकायत है हमें ऐ तुझसे जिंदगी. अब तेरे बारे में भी एक किताब लिखूँगी. लिखते लिखते ख़त्म न हो जाए ये जिंदगी , एक ही शब्द में कायनात लिखूँगी. पूरी - ShareChat
#📝कविता / शायरी/ चारोळी
📝कविता / शायरी/ चारोळी - मुस्कुराते थे कभी बेपरवाह अंदाज़ से, हम भी ব্ধী ব্রুম্ত  देखा है आज खुद तस्वीरों में। पुरानी वक़्त ने जैसे चुरा ली हो हँसी होंठों की, खामोशी बसती है अब हर एक तदबीरों में। वो जो कल तक थे हमारे हर सफ़र के हमसफ़र, ही लिखा है अब भी तक़दीरों में। नाम उनका दिल ने चाहा था कि रुक जाएँ वो लम्हे वहीं , पर कहाँ वक़्त ठहरता है किसी ज़ंजीरों में। हमने सोचा भी न था यूँ बदल जाएँगे हम, खुद को ढूँढा है कई दफ़ा अपनी तहरीरों में। कभी महफ़िल की रौनक थे, हँसी का कारवाँ, तन्हाई ही मिलती है हमें तदबीरों में। সাত मुस्कुराते थे कभी बेपरवाह अंदाज़ से, हम भी ব্ধী ব্রুম্ত  देखा है आज खुद तस्वीरों में। पुरानी वक़्त ने जैसे चुरा ली हो हँसी होंठों की, खामोशी बसती है अब हर एक तदबीरों में। वो जो कल तक थे हमारे हर सफ़र के हमसफ़र, ही लिखा है अब भी तक़दीरों में। नाम उनका दिल ने चाहा था कि रुक जाएँ वो लम्हे वहीं , पर कहाँ वक़्त ठहरता है किसी ज़ंजीरों में। हमने सोचा भी न था यूँ बदल जाएँगे हम, खुद को ढूँढा है कई दफ़ा अपनी तहरीरों में। कभी महफ़िल की रौनक थे, हँसी का कारवाँ, तन्हाई ही मिलती है हमें तदबीरों में। সাত - ShareChat
#📝कविता / शायरी/ चारोळी
📝कविता / शायरी/ चारोळी - तुम हो तो ये घर लगता है वरना इसमें डर लगता है कुछ भी नज़र ना आए मुझको आईना पत्थर लगता है যুঁ ননিমানা 3$77 उसका हूँ डर लगता है सच कहता जो ऊँचा सर होता है ना इक दिन धरती पर लगता है चमक रहे हैं रेत के ज़र्रे प्यासों को सागर लगता है तुम हो तो ये घर लगता है वरना इसमें डर लगता है कुछ भी नज़र ना आए मुझको आईना पत्थर लगता है যুঁ ননিমানা 3$77 उसका हूँ डर लगता है सच कहता जो ऊँचा सर होता है ना इक दिन धरती पर लगता है चमक रहे हैं रेत के ज़र्रे प्यासों को सागर लगता है - ShareChat
#📝कविता / शायरी/ चारोळी
📝कविता / शायरी/ चारोळी - ये ख़याल था कभी ख़्वाब में तुझे देखते, कभी ज़िंदगी की किताब में तुझे देखते। कभी चाँदनी में तेरी सूरत नज़र आ जाती, कभी रात के आफ़ताब में तुझे देखते। तेरी याद आई तो हर तरफ़ तू ही तू लगा, कभी दिल में , कभी हिजाब में तुझे देखते। लिए हमने चाहा था तुझे उम्र भर के हर सुबह, हर शाम के हिसाब में तुझे देखते। तेरे बाद भी ये दिल को ढूंढता रहा, तुझी कभी अश्कों के सैलाब में तुझे देखते। कभी राहों में तेरी आहट सी सुनाई देती, कभी तन्हा से इक जवाब में तुझे देखते। ये मोहब्बत भी अजीब सी दास्तां निकली, कभी दर्द में , कभी गुलाब में तुझे देखते। दिल की यही आरज़ू रही हरदम, कभी हक़ीक़त में , कभी ख़्वाब में तुझे देखते। ये ख़याल था कभी ख़्वाब में तुझे देखते, कभी ज़िंदगी की किताब में तुझे देखते। कभी चाँदनी में तेरी सूरत नज़र आ जाती, कभी रात के आफ़ताब में तुझे देखते। तेरी याद आई तो हर तरफ़ तू ही तू लगा, कभी दिल में , कभी हिजाब में तुझे देखते। लिए हमने चाहा था तुझे उम्र भर के हर सुबह, हर शाम के हिसाब में तुझे देखते। तेरे बाद भी ये दिल को ढूंढता रहा, तुझी कभी अश्कों के सैलाब में तुझे देखते। कभी राहों में तेरी आहट सी सुनाई देती, कभी तन्हा से इक जवाब में तुझे देखते। ये मोहब्बत भी अजीब सी दास्तां निकली, कभी दर्द में , कभी गुलाब में तुझे देखते। दिल की यही आरज़ू रही हरदम, कभी हक़ीक़त में , कभी ख़्वाब में तुझे देखते। - ShareChat
#📝कविता / शायरी/ चारोळी
📝कविता / शायरी/ चारोळी - तुम हकीकत नहीं हसरत हो, जो मिले ख्वाब में वो दौलत हो, किस तरह छोर "जाना" दू तुम्हें तुम मेरी जिँदगी की आदत हो , किसलिए देखते हो "आईना" तुम तो खुद से भी खुबसूरत हो| दास्तां खतम होने वाली है, कि दास्ताँ ख़तम होने वाली है, तुम मेरी आखिरी मोहब्बत होे | ख्वाब है जिसे मैं कभी नहीं तू मेरा पा सकती 8:10 तुम हकीकत नहीं हसरत हो, जो मिले ख्वाब में वो दौलत हो, किस तरह छोर "जाना" दू तुम्हें तुम मेरी जिँदगी की आदत हो , किसलिए देखते हो "आईना" तुम तो खुद से भी खुबसूरत हो| दास्तां खतम होने वाली है, कि दास्ताँ ख़तम होने वाली है, तुम मेरी आखिरी मोहब्बत होे | ख्वाब है जिसे मैं कभी नहीं तू मेरा पा सकती 8:10 - ShareChat