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#📝कविता / शायरी/ चारोळी
📝कविता / शायरी/ चारोळी - मनकी लिखूँ  तो रुठ  जाते   हैं, शब्द और लिखूँ  तो अपने ही रुठ जाते हैं . सच कैसे   लिखूँ  वो दर्द जो अंदर & छुपा रिश्ते   टूट जाते हैं ॰ यहाँ सच्चाई हर पर 8 अब   मेरा समझता   है , कागज़ हाल में  थोड़ा - थोड़ा रोता है। గ लफ्ज़ थरथरा   जाती है लिखते - लिखते , 9 कलम दिल अपना   ही লঠানা & সন্ ননান चुप  रहना ही बेहतर कभी লমনা &, क्योंकि  बोलो तो लोग নবল নান & अपना সমসা था उम्र ೩, सुनकर   निकल जाते हैं। सच्चाई ٩٤ थे दुनिया भी अजीब सा खेल खेलती है , सच पे सवाल करती है। पे तालियाँ और झनठ 1 & 314<<, எ = साफ़ নমী   সনস होता   है | ননলাম ज्यादा आदत सी हो गई है सहने की, 77 अब हर   दर्द को   मुस्कुराकर की | छुपाने दिखाओ  तो कमजोर कहते हैं, क्योंकि যমা जज्बात समझदार  बताते हैं . और रहो   तो खामोश मनकी लिखूँ  तो रुठ  जाते   हैं, शब्द और लिखूँ  तो अपने ही रुठ जाते हैं . सच कैसे   लिखूँ  वो दर्द जो अंदर & छुपा रिश्ते   टूट जाते हैं ॰ यहाँ सच्चाई हर पर 8 अब   मेरा समझता   है , कागज़ हाल में  थोड़ा - थोड़ा रोता है। గ लफ्ज़ थरथरा   जाती है लिखते - लिखते , 9 कलम दिल अपना   ही লঠানা & সন্ ননান चुप  रहना ही बेहतर कभी লমনা &, क्योंकि  बोलो तो लोग নবল নান & अपना সমসা था उम्र ೩, सुनकर   निकल जाते हैं। सच्चाई ٩٤ थे दुनिया भी अजीब सा खेल खेलती है , सच पे सवाल करती है। पे तालियाँ और झनठ 1 & 314<<, எ = साफ़ নমী   সনস होता   है | ননলাম ज्यादा आदत सी हो गई है सहने की, 77 अब हर   दर्द को   मुस्कुराकर की | छुपाने दिखाओ  तो कमजोर कहते हैं, क्योंकि যমা जज्बात समझदार  बताते हैं . और रहो   तो खामोश - ShareChat
#📝कविता / शायरी/ चारोळी
📝कविता / शायरी/ चारोळी - तो एक  निशानी हूँ मैं रख सकों खो दो तो सिर्फ एक कहानी हूँ मैं रोक ना पाए जिसको ये सारी दुनेिया वा एक बूंद ऑख का पाना हू मै.. सबको प्यार देने की आदत है हमें अपनी अलग पहचान बनाने को आदत है कितना भी गहरा जख्म दे कोई की आदत है हमें . उतना ही ज्यादा मुस्कुरानें  अजनबी दुनिया में अकेला ख्वाब हूँ मैं इस सवालों से खफा छोटा सा जवाब हूँ मै जो समझ ना सके मुझे उनके लिए कौन g जो समझ गए उनके किताब हूँ मैं. . खुली आँख से देखोगे तो खश पाओगे दिल से पछोगे तो दर्द का सैलाब हँ मैं अगर रख सकों तो एक निशानी हं मैं खो दो तो सिर्फ एक कहानी हूँ मैं. . तो एक  निशानी हूँ मैं रख सकों खो दो तो सिर्फ एक कहानी हूँ मैं रोक ना पाए जिसको ये सारी दुनेिया वा एक बूंद ऑख का पाना हू मै.. सबको प्यार देने की आदत है हमें अपनी अलग पहचान बनाने को आदत है कितना भी गहरा जख्म दे कोई की आदत है हमें . उतना ही ज्यादा मुस्कुरानें  अजनबी दुनिया में अकेला ख्वाब हूँ मैं इस सवालों से खफा छोटा सा जवाब हूँ मै जो समझ ना सके मुझे उनके लिए कौन g जो समझ गए उनके किताब हूँ मैं. . खुली आँख से देखोगे तो खश पाओगे दिल से पछोगे तो दर्द का सैलाब हँ मैं अगर रख सकों तो एक निशानी हं मैं खो दो तो सिर्फ एक कहानी हूँ मैं. . - ShareChat
#📝कविता / शायरी/ चारोळी
📝कविता / शायरी/ चारोळी - कम और अरमान बहुत हैं खुशियाँ जिसे भी देखो परेशान बहुत है | करीब से देखा तो निकला रेत का घर मगर दूर से इसकी शान बहुत है | कहते हैं सच का कोई मुकाबला नहीं, मगर आज झूठ की पहचान बहुत है | मुश्किल से मिलता है शहर में आदमी, यूँ तो कहने को इन्सान बहुत है कम और अरमान बहुत हैं खुशियाँ जिसे भी देखो परेशान बहुत है | करीब से देखा तो निकला रेत का घर मगर दूर से इसकी शान बहुत है | कहते हैं सच का कोई मुकाबला नहीं, मगर आज झूठ की पहचान बहुत है | मुश्किल से मिलता है शहर में आदमी, यूँ तो कहने को इन्सान बहुत है - ShareChat