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#मेरी कविता #📚कविता-कहानी संग्रह
मेरी कविता - নঐ মাথ-থ নেল ডন # जो परिवर्तन आया है उसने मुझे खुद से मिलाया है " हां सच में खुद से मिलाया है " पहले कहां मैं अल्हड़ सी थी जागीर सी हूं अब मैं एक समझदार वफादार पहले मैं रोती थी छोटी छोटी बात पर हंसती हूं बड़ी बड़ी याद पर अब शोर नहीं खामोशी मुझे भाती है 3 दुनिया की भीड़ में खुद की आवाज आती है जो खो गया उसका अब मलाल नहीं जो पास है उस पर कोई सवाल नहीं किसी से चंद लम्हों की होती है नाराजगी अब मेरी मुस्कुराहट अब गहरे सब्र में सोती है मैंने छोड़ दिया है अब बेवजह का संवरना सीख लिया है मैंने अपनी रूह से निखरना मैं अब कोई पहेली नहीं एक साफ़ किताब हूँ अपने ही सवालों का मैं खुद ही जवाब हूँ वक्त ने सिखाया कैसे खुद का साथ निभाया जाता है तप कर ही मिट्टी को सोना बनाया जाता है स्वाती छीपा... নঐ মাথ-থ নেল ডন # जो परिवर्तन आया है उसने मुझे खुद से मिलाया है " हां सच में खुद से मिलाया है " पहले कहां मैं अल्हड़ सी थी जागीर सी हूं अब मैं एक समझदार वफादार पहले मैं रोती थी छोटी छोटी बात पर हंसती हूं बड़ी बड़ी याद पर अब शोर नहीं खामोशी मुझे भाती है 3 दुनिया की भीड़ में खुद की आवाज आती है जो खो गया उसका अब मलाल नहीं जो पास है उस पर कोई सवाल नहीं किसी से चंद लम्हों की होती है नाराजगी अब मेरी मुस्कुराहट अब गहरे सब्र में सोती है मैंने छोड़ दिया है अब बेवजह का संवरना सीख लिया है मैंने अपनी रूह से निखरना मैं अब कोई पहेली नहीं एक साफ़ किताब हूँ अपने ही सवालों का मैं खुद ही जवाब हूँ वक्त ने सिखाया कैसे खुद का साथ निभाया जाता है तप कर ही मिट्टी को सोना बनाया जाता है स्वाती छीपा... - ShareChat