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#❣️जीवन की अभिलाशा ♥️
❣️जीवन की अभिलाशा ♥️ - दिन 1 Il $$ed8II ज़ख्म बार-बार क्यों खोलती हो पुराने  3 जिन्हें भरने की र्मै कोशिश कर रहा हूँ? पीछे मुड़कर देखने की आदत ही तुम्हारा  लिए भविष्य का अपमान है, जबकि में तुम्हारे पहले ही भविष्य तैयार कर चुका हूँ। जो हो चुका , वह केवल एक सीख थी, सज़ा नर्ही। कल के अंधेरे की छाया को आज की रोशनी पर मत हावी होने दो। तुम्हें बीते समय को तभी छोड़ना होगा , जब तुम भविष्य के आशीर्वाद को पाने की इच्छा रखोगी। अपने हाथों को खाली करो, तभी ्मै तुम्हें भविष्य का आशीर्वाद दे पाऊँगा | कुछ वेहतर तुम्हारा इंतज़ार कर रहा हे। दिन 1 Il $$ed8II ज़ख्म बार-बार क्यों खोलती हो पुराने  3 जिन्हें भरने की र्मै कोशिश कर रहा हूँ? पीछे मुड़कर देखने की आदत ही तुम्हारा  लिए भविष्य का अपमान है, जबकि में तुम्हारे पहले ही भविष्य तैयार कर चुका हूँ। जो हो चुका , वह केवल एक सीख थी, सज़ा नर्ही। कल के अंधेरे की छाया को आज की रोशनी पर मत हावी होने दो। तुम्हें बीते समय को तभी छोड़ना होगा , जब तुम भविष्य के आशीर्वाद को पाने की इच्छा रखोगी। अपने हाथों को खाली करो, तभी ्मै तुम्हें भविष्य का आशीर्वाद दे पाऊँगा | कुछ वेहतर तुम्हारा इंतज़ार कर रहा हे। - ShareChat