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पद गोरखनाथ #संतो की रचनायें
संतो की रचनायें - पद कहा बूझै अवधू राई, गगन न धरनीं। चंदन सूर दिवस नहीं रैनी II ऊँकार निराकार सूछिम न अस्थूलं। पेड़ न पत्र फलै नहीं फूलंIl डाल न मूल न बृच्छ न बेला। साखी न सबद गुरु नहीं चेलाII ग्यानें न ध्यानें जोगे न जुक्ता। पापे न पुंये मोखे न मुक्ता।I उपजै न बिनसै आवै न जाई। जुरा न मरण वाकै बाप न माई।I भणत गोरखनाथ मछिंद्र नां दासा| भाव भगति आस न पासा Il गोरखनाथ Motivational Videos App Want पद कहा बूझै अवधू राई, गगन न धरनीं। चंदन सूर दिवस नहीं रैनी II ऊँकार निराकार सूछिम न अस्थूलं। पेड़ न पत्र फलै नहीं फूलंIl डाल न मूल न बृच्छ न बेला। साखी न सबद गुरु नहीं चेलाII ग्यानें न ध्यानें जोगे न जुक्ता। पापे न पुंये मोखे न मुक्ता।I उपजै न बिनसै आवै न जाई। जुरा न मरण वाकै बाप न माई।I भणत गोरखनाथ मछिंद्र नां दासा| भाव भगति आस न पासा Il गोरखनाथ Motivational Videos App Want - ShareChat