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#✍️ साहित्य एवं शायरी #✍️ अनसुनी शायरी #🖊 एक रचना रोज़ ✍ #सोना की जिंदगी कुछ इस तरह
✍️ साहित्य एवं शायरी - जिसकी जड़ें बंजर जमीन में पनपी हो उसका वजूद गिरे हुए पत्तों से नहीं आंकते. जिसकी जड़ें बंजर जमीन में पनपी हो उसका वजूद गिरे हुए पत्तों से नहीं आंकते. - ShareChat