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#satnam waheguru ji #satnam shri waheguru ji #Meetha Lage Tera bhana
satnam waheguru ji - 0 जिनि एहि लिखे तिसु सिरि नाहि।१ िवा फ़ुरमाए तिव तिव पाहि।। हे भाई! वह परमात्मा , जिसने इस संपूर्ण सृष्टि के भाग्य मै तेरा और कर्मों का लेख लिखा है, स्वयं किसी भी बंधन या लेख के अधीन नहीं है। वह अकाल' और स्वतंत्र है; उस भिखारी पर किसी अन्य का हुक्म नहीं चलता। वह रचयिता होने के नाते अपने बनाए नियमों से ऊपर हैl संसार की हर जिओ हलचल उस प्रभु की रजा और उसके अटल विधान के अनुसार ही होती है। प्रत्येक जीव को उसके कर्मों और পঙ্কাভা प्रभु के हुक्म के अनुसार ही सुख दुख या फल की प्राप्ति বাল होती है। वह 'करता पुरखु है, जिस पर किसी का कोई दबाव नहीं। हम सब तो उसके बनाए नियमों की मर्यादा बाबा में बँधे हैं, जबकि वह पूर्णतः मुक्त और स्वतंत्र है। अतः मनुष्य को कभी यह अहंकार नहीं करना चाहिए कि वह जी अपनी मर्जी से सब कुछ कर रहा है। वास्तविकता यही है कि जीवन का प्रत्येक क्षण उस 'करतार के हुक्म के दायरे में ही घटित हो रहा है। 0 जिनि एहि लिखे तिसु सिरि नाहि।१ िवा फ़ुरमाए तिव तिव पाहि।। हे भाई! वह परमात्मा , जिसने इस संपूर्ण सृष्टि के भाग्य मै तेरा और कर्मों का लेख लिखा है, स्वयं किसी भी बंधन या लेख के अधीन नहीं है। वह अकाल' और स्वतंत्र है; उस भिखारी पर किसी अन्य का हुक्म नहीं चलता। वह रचयिता होने के नाते अपने बनाए नियमों से ऊपर हैl संसार की हर जिओ हलचल उस प्रभु की रजा और उसके अटल विधान के अनुसार ही होती है। प्रत्येक जीव को उसके कर्मों और পঙ্কাভা प्रभु के हुक्म के अनुसार ही सुख दुख या फल की प्राप्ति होती है। वह 'करता पुरखु है, जिस पर किसी का कोई दबाव नहीं। हम सब तो उसके बनाए नियमों की मर्यादा बाबा में बँधे हैं, जबकि वह पूर्णतः मुक्त और स्वतंत्र है। अतः मनुष्य को कभी यह अहंकार नहीं करना चाहिए कि वह जी अपनी मर्जी से सब कुछ कर रहा है। वास्तविकता यही है कि जीवन का प्रत्येक क्षण उस 'करतार के हुक्म के दायरे में ही घटित हो रहा है। - ShareChat