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भगवद्गीता - जो सब प्राणियों के सुख और दुःख को अपने सुख और दुःख के समान समझता है, वह परम श्रेष्ठ योगी/भक्त है। जय श्री कृष्ण 🙏 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - आत्मौपम्येन सर्वत्र समं पश्यति योडर्जुन। सुखं वा यदि वादुखंसेयोगी फौग़ो यत ( शुभ रात्रि आत्मौपम्येन सर्वत्र समं पश्यति योडर्जुन। सुखं वा यदि वादुखंसेयोगी फौग़ो यत ( शुभ रात्रि - ShareChat