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#ધર્મ અને અધ્યાત્મ #🙏 જય શ્રી કૃષ્ણ
ધર્મ અને અધ્યાત્મ - एक संत ने एक द्वार पर दस्तक दी और आवाज़़ लगाई भिक्षां देहि। एक छोटी सी बच्ची बाहर आई, बोली, " बाबा, हम गरीब हैं, हमारे पास देने को कुछ नहीं है संत बोले, "बेटी, मना मत कर, अपने आँगन की धूल ही दे दे।" लड़की ने एक मुट्ठी धूल उठाई और भिक्षा- पात्र में डाल दी "गुरु जी, धूल भी कोई भिक्षा है! आपने धूल ने पूछा, शिष्य देने को क्यों कहा?' संत बोले, " बेटा, अगर वह आज न कह देती तो फिर कभी दान नहीं दे पाती। धूल दी तो क्या हुआ, दान देने का संस्कार तो पड़ गया, धूल दी है तो उसमें दान देने की भावना तो जागी। आज एक संत ने एक द्वार पर दस्तक दी और आवाज़़ लगाई भिक्षां देहि। एक छोटी सी बच्ची बाहर आई, बोली, " बाबा, हम गरीब हैं, हमारे पास देने को कुछ नहीं है संत बोले, "बेटी, मना मत कर, अपने आँगन की धूल ही दे दे।" लड़की ने एक मुट्ठी धूल उठाई और भिक्षा- पात्र में डाल दी "गुरु जी, धूल भी कोई भिक्षा है! आपने धूल ने पूछा, शिष्य देने को क्यों कहा?' संत बोले, " बेटा, अगर वह आज न कह देती तो फिर कभी दान नहीं दे पाती। धूल दी तो क्या हुआ, दान देने का संस्कार तो पड़ गया, धूल दी है तो उसमें दान देने की भावना तो जागी। आज - ShareChat