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#GodNightThursday #Kalyug_Mein_SatyugKiShuruat6 . आशा और तृष्णा भगत आत्माऔ,! देखो आशा और तृष्णा दोनों बहनें हैं और इन दोनों का जोड़ा है। ये दोनों ही काल के हुक्म में बंधी रहती हैं और उसके हुकम से कभी बाहर नहीं जाती । ये दोनों बंदे के अंदर घुसकर व अपने जाल में फंसा कर उसको 84 लाख योनियों में भर्मा देती हैं । यह इनका नित्य, रोज का कर्म है। आशा कहती है कि अपनी बहन तृष्णा को बोलती है कि सुन बहन तृष्णा, देख ! मैं कितनी चालाक हूं । मैं इस बंदे के अंदर रम कर इसको सारी उम्र पैसे, औलाद, ठाठ-बाठ , खाने-पीने आदि की आशा ही आशा में रख देती हूं और सतगुरु का कभी खोज नहीं करने देती । अंत समय में इसको यम के दूत पकड़ ले जाते हैं और चौरासी में डाल देते हैं। फिर तृष्णा कहती है कि सुन बहन आशा अब तू मेरी भी सुन, मैं तुझ से कितनी ज्यादा चालाक और तगड़ी हूं । जब मैं बंदे के अंदर बैठ जाती हूं तो बंदे को ऐसी तृष्णा लगाती हूं कि वो सब बातों को भूल जाता है और तृष्णा में फंस कर मन व इंद्रियों का यार हो जाता है तथा अपनी सारी उम्र विषय विकारों में बिता देता है। बंदा जितनी भी आशाएं लेकर चलता है उन सब पर पानी फेर देती हूं। जब अंत समय आता है तो बंदा अपने किये हुए पर सिर धुन धुन कर पछताता है। इसलिए परम संत रामपाल दास महाराज जी कहते है कि आशा व तृष्णा से बचो। ये सबके मन मे काल के दूत बनकर निवास करते है। और जीवआत्मा को भगती मार्ग पर नही लगने देते। "फिर जीव इनके चक्र मे चौरासी मे चला जाता है।" Watch Factful Debates Yt #sant ram pal ji maharaj #me follow
sant ram pal ji maharaj - संत रामपाल जी मह्याराज संत रामपाल जी मह्याराज - ShareChat