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#☝ मेरे विचार
☝ मेरे विचार - मायनोंकींतलाश शाह के शब्दों का अर्थ समझें बुल्ले शाह कीये पंक्तियां बहुत प्रसिद्ध हैं- कि मैं न मुसलमान हूं॰ न हिंदूः न पूर्व का हूं॰ न की जाणां मैं कौन। S7 इसका शाब्दिक पश्चिम काः न यह हूं॰ न वह। वे हर पहचान को बुल्ले, मैं क्या जानूं कि मैं कौन हूं? अर्थ है हटाते जाते हैं। यह नेति ्नेति की औपनिषदिक लेकिन सूफी और आध्यात्मिक संदर्भ में इसका पद्धति और सूफी मत की फना से भी मिलती- अर्थ कहीं अधिक गहरा है। बात है। वे एक॰एक करके सभी आरोपित बुल्ले 9||6  46/ பளி उन सभी पहचानों का निषेध कर रहे हैं जिनसे पहचानों का निषेध इसलिए करते है ताकि उस मनुष्य स्वयं को बांध लेता है- जैसे धर्म जाति सत्य की ओर संकेत कर सके, जो किसी परिभाषा सम्प्रदाय राष्ट्र पद, प्रतिष्ठा आदि।वे कहते हैं में बंध नहीं सकता। १ मिनट रीड मायनोंकींतलाश शाह के शब्दों का अर्थ समझें बुल्ले शाह कीये पंक्तियां बहुत प्रसिद्ध हैं- कि मैं न मुसलमान हूं॰ न हिंदूः न पूर्व का हूं॰ न की जाणां मैं कौन। S7 इसका शाब्दिक पश्चिम काः न यह हूं॰ न वह। वे हर पहचान को बुल्ले, मैं क्या जानूं कि मैं कौन हूं? अर्थ है हटाते जाते हैं। यह नेति ्नेति की औपनिषदिक लेकिन सूफी और आध्यात्मिक संदर्भ में इसका पद्धति और सूफी मत की फना से भी मिलती- अर्थ कहीं अधिक गहरा है। बात है। वे एक॰एक करके सभी आरोपित बुल्ले 9||6  46/ பளி उन सभी पहचानों का निषेध कर रहे हैं जिनसे पहचानों का निषेध इसलिए करते है ताकि उस मनुष्य स्वयं को बांध लेता है- जैसे धर्म जाति सत्य की ओर संकेत कर सके, जो किसी परिभाषा सम्प्रदाय राष्ट्र पद, प्रतिष्ठा आदि।वे कहते हैं में बंध नहीं सकता। १ मिनट रीड - ShareChat