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#☝ मेरे विचार
☝ मेरे विचार - शब्दोंकाजादू ঘংলীসেযা बरसों से एक घर दिल में रहता था हमने एक दिन उसे वास्तुकार को सौंप दिया उसने उसे राजगीर के हवाले किया राजगीर हमारे रक्त और पसीने को उलीच उलीच कर गारा बनाता रहा और ईँटों के शिल्प से मकान बना डाला अब उसे घर बनना था। मैंने भाइयों से इसके लिए  भाईचारा मांगा अभिभावक की छत्रछाया चाही पड़ोसियों का सहयोग जुटाया इस तरह ईंँटों का एक अदद मंकान घर बनने को तैयार हो गया। पर अहं की चक्रीय पदचाप प्रवेश कर इस तरह फैलने लगी कि रंच मात्रभी नहीं बची जगह लौट गए सारे अवयव पूरी रका घर लौट गया। पढने के कौशल, बेगूसराय, बिहार -कला QR को ( मूल कविता के सम्पादित अंश ) स्कैनक शब्दोंकाजादू ঘংলীসেযা बरसों से एक घर दिल में रहता था हमने एक दिन उसे वास्तुकार को सौंप दिया उसने उसे राजगीर के हवाले किया राजगीर हमारे रक्त और पसीने को उलीच उलीच कर गारा बनाता रहा और ईँटों के शिल्प से मकान बना डाला अब उसे घर बनना था। मैंने भाइयों से इसके लिए  भाईचारा मांगा अभिभावक की छत्रछाया चाही पड़ोसियों का सहयोग जुटाया इस तरह ईंँटों का एक अदद मंकान घर बनने को तैयार हो गया। पर अहं की चक्रीय पदचाप प्रवेश कर इस तरह फैलने लगी कि रंच मात्रभी नहीं बची जगह लौट गए सारे अवयव पूरी रका घर लौट गया। पढने के कौशल, बेगूसराय, बिहार -कला QR को ( मूल कविता के सम्पादित अंश ) स्कैनक - ShareChat