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#❤️जीवन की सीख 🌟 || संग्रह नहीं, दान श्रेष्ठ है || 🌟 संग्रह की अपेक्षा दान को सदैव श्रेष्ठ माना गया है। स्वयं की इच्छा से किसी वस्तु अथवा पदार्थ को छोड़ना त्याग तथा स्वयं की इच्छा न होते हुए किसी वस्तु अथवा पदार्थ का छूट जाना नाश कहलाता है। त्याग और नाश ये एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। प्रकृति का अपना एक शाश्वत नियम है कि यहाँ मान, पद, प्रतिष्ठा, वैभव कुछ भी और कभी भी शाश्वत नहीं रहता है। जो बाँटना नहीं जानते समय उनसे लेना भी जानता है। जिन फलों को वृक्ष द्वारा बाँटा नहीं जाता एक समय उन फलों में अपने आप सड़न आने लगती है और वो सड़कर वृक्ष को भी दुर्गंधयुक्त कर देते हैं। इसी प्रकार समय आने पर प्रकृति द्वारा सब कुछ स्वतः ले लिया जायेगा, अब ये आप पर निर्भर करता है कि आप बाँटकर अपने यश और कीर्ति की सुगंधी को बिखेरना चाहते या संभालकर संग्रह और आसक्ति की दुर्गंध को रखना चाहते हैं। कुआँ अपना जल सबको बाँटता है इसलिए स्वच्छ बना रहता है।🖋️ जय श्री राधे कृष्ण ⛓️‍💥⛓️‍💥⛓️‍💥⛓️‍💥⛓️‍💥⛓️‍💥⛓️‍💥⛓️‍💥⛓️‍💥⛓️‍💥
❤️जीवन की सीख - प्रार्थना' से परिस्थिति बदले या न बदले, पर व्यक्ति का चित्त अवश्य बदल जाता है! जय हो मेरे प्रभु की । जयश्री कृष्णा । प्रार्थना' से परिस्थिति बदले या न बदले, पर व्यक्ति का चित्त अवश्य बदल जाता है! जय हो मेरे प्रभु की । जयश्री कृष्णा । - ShareChat