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#satnam waheguru ji #satnam shri waheguru ji #Meetha Lage Tera bhana
satnam waheguru ji - जिना सतिगुरु पुरख़ु न भेटिओ से भागहीण वसि कालााओइ फिरि फिरि जोनि भवाईअहि विचि विसटा करि विकराल ा। अर्थः जिन लोगों को अकाल पुरख का रूप सतिगुरू कभी नहीं मिला, वे वास्तव # dT में बड़े भाग्यहीन और दुर्भाग्यशाली हैं; वे सदैव आत्मिक मौत के वश में रहते हैं। सतिगुरु की शरण और नाम सिमरन के बिना मनुष्य का जीवन विकारों की गंदगी भिखारी में उलझकर रह जाता है। ऐसे लोग विकारों, लोभ और अहंकार रूपी भयानक তিঙজী गंदगी के भीतर रहकर अत्यंत कष्टदायक जीवन जीते हैं, जिससे उनका आत्मिक पतन हो जाता है। इसी कारण वे भयानक आत्मिक जीवन वाले बनकर बारबार योनियों और जन्म मरण के चक्र में डाले जाते हैं। (हे भाई!) गुरु ही वह एकमात्र পঙ্াভা माध्यम हैं जो जीव को इस भयानक संसार सागर (भवसागर) और चौरासी के वाले चक्र से मुक्त करवाकर परमात्मा से मिला सकते हैं। हे भाई!परमात्मा को पाने या विकारों से छूटने का कोई शॉर्टकट नहीं है। सच्चा बाबा गुरु ही वह रोशनी है जो अज्ञानता के अंधेरे को काटती है। शारीरिक मृत्यु तो से टूटा हुआ इंसान हर पल आत्मिक केवल एक बार होती है, लेकिन नाम सिमरन' U रूप से मर रहा होता है (लोभ, मोह और क्रोध के अधीन होकरो] यह संसार एक और गुरु i (ुरबाणी/नाम) उस दलदल या भयानक समुद्र की तरह है, काशब्द की तरह है जो हमें : 7443[ डूबने ; जहाज जिना सतिगुरु पुरख़ु न भेटिओ से भागहीण वसि कालााओइ फिरि फिरि जोनि भवाईअहि विचि विसटा करि विकराल ा। अर्थः जिन लोगों को अकाल पुरख का रूप सतिगुरू कभी नहीं मिला, वे वास्तव # dT में बड़े भाग्यहीन और दुर्भाग्यशाली हैं; वे सदैव आत्मिक मौत के वश में रहते हैं। सतिगुरु की शरण और नाम सिमरन के बिना मनुष्य का जीवन विकारों की गंदगी भिखारी में उलझकर रह जाता है। ऐसे लोग विकारों, लोभ और अहंकार रूपी भयानक তিঙজী गंदगी के भीतर रहकर अत्यंत कष्टदायक जीवन जीते हैं, जिससे उनका आत्मिक पतन हो जाता है। इसी कारण वे भयानक आत्मिक जीवन वाले बनकर बारबार योनियों और जन्म मरण के चक्र में डाले जाते हैं। (हे भाई!) गुरु ही वह एकमात्र পঙ্াভা माध्यम हैं जो जीव को इस भयानक संसार सागर (भवसागर) और चौरासी के वाले चक्र से मुक्त करवाकर परमात्मा से मिला सकते हैं। हे भाई!परमात्मा को पाने या विकारों से छूटने का कोई शॉर्टकट नहीं है। सच्चा बाबा गुरु ही वह रोशनी है जो अज्ञानता के अंधेरे को काटती है। शारीरिक मृत्यु तो से टूटा हुआ इंसान हर पल आत्मिक केवल एक बार होती है, लेकिन नाम सिमरन' U रूप से मर रहा होता है (लोभ, मोह और क्रोध के अधीन होकरो] यह संसार एक और गुरु i (ुरबाणी/नाम) उस दलदल या भयानक समुद्र की तरह है, काशब्द की तरह है जो हमें : 7443[ डूबने ; जहाज - ShareChat