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#✒ गुलज़ार की शायरी 🖤 #👍स्पेशल शायरी🖋 #📖Whatsapp शायरी
✒ गुलज़ार की शायरी 🖤 - हवा को गुमान था अपनी आजादी पर, किसी ने उसे भी ೫ गुब्बारे भर के बेच दिया.. हवा को गुमान था अपनी आजादी पर, किसी ने उसे भी ೫ गुब्बारे भर के बेच दिया.. - ShareChat