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#Shayar Siva #मेरे अल्फाज #📚कविता-कहानी संग्रह
Shayar Siva - तरस खाते अगर देखने तुम मेरा घर गए होते तुम अगर मेरा तो डर गए होते ঘুসন লাব্ধা बड़ी बातों से तौबा है मगर इतना समझ लीजिए जहां पर जी रहा हूं मैं वहां तुम मर गए होते छिड़कते हैं मेरे जख्मों पर नमक मेरे अपने रिश्तेदार नहीं तो मुमकिन था जख्म कुछ भर गए होते मजबूती से थामा था वहां पर भी मगर सब्र का हाथ वरना हाथ से कितनों के मेरे सर गए होते sival तरस खाते अगर देखने तुम मेरा घर गए होते तुम अगर मेरा तो डर गए होते ঘুসন লাব্ধা बड़ी बातों से तौबा है मगर इतना समझ लीजिए जहां पर जी रहा हूं मैं वहां तुम मर गए होते छिड़कते हैं मेरे जख्मों पर नमक मेरे अपने रिश्तेदार नहीं तो मुमकिन था जख्म कुछ भर गए होते मजबूती से थामा था वहां पर भी मगर सब्र का हाथ वरना हाथ से कितनों के मेरे सर गए होते sival - ShareChat