Annu
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🚨 क्या है मुख्य खबर?
11 साल का सबसे सूखा मानसून: मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, एल नीनो के मजबूत होने के कारण इस साल भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून 'सामान्य से काफी कम' (Below-Normal) रहने की आशंका है। अनुमान है कि इस बार दीर्घकालिक औसत (LPA) की केवल 90% बारिश ही होगी। विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर ऐसा हुआ तो यह पिछले 11 वर्षों में सबसे कम बारिश का रिकॉर्ड होगा।
देरी से दस्तक: मानसून ने केरल में सामान्य तारीख (1 जून) के बजाय 4 जून को देरी से दस्तक दी है, और इसके पीछे भी एल नीनो के बढ़ते प्रभाव को ही जिम्मेदार माना जा रहा है।
'सुपर एल नीनो' का खतरा: अमेरिकी एजेंसी (NOAA) और यूरोपीय फोरकास्ट (ECMWF) के अनुसार, प्रशांत महासागर का तापमान सामान्य से 3.5°C तक ज्यादा बढ़ सकता है, जो कि एक "सुपर एल नीनो" की स्थिति है। यह साल 1876-1878 के उस दौर की याद दिला रहा है जब एशिया ने पिछले 800 सालों का सबसे भयानक सूखा देखा था।
🌾 भारत पर इसका क्या और कितना बड़ा असर होगा?
एल नीनो का असर सिर्फ मौसम बदलने तक सीमित नहीं है, यह देश की जेब और पेट दोनों पर सीधा वार करता है:
1. खेती और खरीफ फसलों को भारी नुकसान
भारत के लगभग 50% से 60% किसान सिंचाई के लिए पूरी तरह मानसून की बारिश पर निर्भर हैं। जून से सितंबर के बीच होने वाली कम बारिश के कारण धान (चावल), मक्का, कपास, सोयाबीन और दालों की बुआई में देरी होगी और पैदावार घटने का बड़ा खतरा मंडरा रहा है。
2. महंगाई का दोहरा झटका (Food Inflation)
जब फसलों की पैदावार कम होगी, तो बाजार में अनाज, दालों और सब्जियों की किल्लत हो जाएगी। इससे खाने-पीने की चीजों के दाम तेजी से बढ़ेंगे। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने भी पहले ही चेतावनी दी है कि एल नीनो के कारण देश में रिटेल महंगाई दर बढ़ सकती है।
3. भीषण गर्मी और हीटवेव (Severe Heatwaves)
मौसम विभाग ने देश के कई हिस्सों में सामान्य से अधिक तापमान और भीषण लू (Heatwave) चलने की चेतावनी दी है। उत्तर प्रदेश, बिहार, पंजाब, हरियाणा, ओडिशा, आंध्र प्रदेश और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में लोगों को झुलसाने वाली गर्मी का सामना करना पड़ रहा है。
4. पानी का संकट (Water Scarcity)
कम बारिश होने की वजह से देश के मुख्य जलाशयों (Reservoirs) में पानी का स्तर काफी नीचे गिर जाएगा। इससे न केवल खेती के लिए पानी कम पड़ेगा, बल्कि आने वाले महीनों में पीने के पानी की किल्लत और बिजली उत्पादन (Hydro-power) पर भी असर पड़ सकता है।
## 🌦 क्या कोई राहत की उम्मीद है? (The Silver Lining)
हालांकि स्थिति चिंताजनक है, लेकिन मौसम वैज्ञानिकों ने एक उम्मीद की किरण भी जताई है:
पॉजिटिव इंडियन ओशन डिपोल (Positive IOD): वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इस साल हिंद महासागर में 'पॉजिटिव आईओडी' की स्थिति बन सकती है। सीधे शब्दों में कहें तो जब हिंद महासागर का पश्चिमी हिस्सा गर्म होता है, तो वह भारत में बारिश को बढ़ावा देता है। यह घटना एल नीनो के सूखे वाले प्रभाव को कुछ हद तक कम कर सकती है।
वैज्ञानिकों की सलाह: एल नीनो एक प्राकृतिक आपदा की तरह है। सरकार और किसानों को पैनिक (घबराने) करने के बजाय अभी से जल संरक्षण, कम पानी में उगने वाली फसलों के चयन और आपातकालीन खाद्य भंडारण जैसी पूर्व-तैयारियों (Pre-emptive Planning) पर काम शुरू कर देना चाहिए।
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