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#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #👏भगवान विष्णु😇 कृष्ण त्वदीय पद पंकज पंजरांके, अद्यैव मे विशतु मानस राजहंस:। प्राण प्रयाण समये कफ वात पित्तै:, कंठावरोधन विधौ स्मरणं कुतस्ते।। हे श्रीकृष्ण ! आपके पद पंकजों के पिंजड़े में आज ही ( वर्तमान) मेरा मन रूपी राज हंस विचरण कर रहा है। किन्तु प्राण प्रयाण के समय कफ वात पित्त दोषों से ग्रसित होकर कण्ठावरुद्ध होने पर(संभव है कि आपका) स्मरण कहां हो सकेगा।
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