Bhuvanesh
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Jai Shri Radha Ballabh Lal Ki Radhey Radhey......
#👏भगवान विष्णु😇 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 प्राण शरीर — वह शरीर जो दिखता नहीं, पर जिलाता है हम कहते हैं "शरीर" तो हाथ-पैर दिखते हैं। सनातन कहता है, यह पहला कपड़ा है। इसके भीतर चार और कपड़े हैं। दूसरा कपड़ा है — प्राण शरीर। इसे प्राणमय कोश कहते हैं। यह अन्नमय कोश (हड्डी-मांस) और मनोमय कोश (मन) के बीच का सेतु है। इसे समझो तो बीमारी, थकान, नींद, मृत्यु — सब साफ हो जाते हैं। प्राण क्या है, शरीर क्या है प्राण वायु नहीं है। वायु तो ट्रक है, प्राण उसमें बैठा ड्राइवर। उपनिषद कहते हैं, "प्राणो ब्रह्म।" प्राण ही जीवन है। प्राण शरीर वह ऊर्जा-क्षेत्र है जो अन्न शरीर को चारों ओर से 3-4 अंगुल तक घेरे रहता है। योगी इसे नीले-सफेद धुंध जैसा देखते हैं। किरलियन फोटोग्राफी में यही 'ऑरा' दिखता है। जब तुम जीवित हो, प्राण शरीर अन्न शरीर से चिपका है। मरने पर पहले प्राण शरीर निकलता है, फिर 13 दिन में धीरे-धीरे घुलता है। इसीलिए तेरहवीं करते हैं। पाँच प्राण — एक शरीर, पाँच मजदूर प्राण शरीर में पाँच मुख्य हवाएँ काम करती हैं। इन्हें पंच प्राण कहते हैं। प्राण — छाती में। साँस अंदर लेना, भोजन निगलना। इसका रंग पीला। जब यह कमजोर, तो उदासी, भूख न लगना। अपान — नाभि से नीचे। मल, मूत्र, वीर्य, मासिक बाहर निकालना। रंग धुएँ जैसा। अपान रुका तो कब्ज, डर, पैर भारी। समान — नाभि में। पाचन, संतुलन। रंग हरा। समान बिगड़ा तो गैस, निर्णय न ले पाना। उदान — कंठ में। बोलना, उल्टी, मृत्यु के समय आत्मा को ऊपर ले जाना। रंग बैंगनी। उदान तेज तो वाणी में असर, कम तो गला बैठा। व्यान — पूरे शरीर में। रक्त घुमाना, पसीना, कंपन। रंग नीला। व्यान रुका तो सुन्नपन, ठंड लगना। ये पाँच मिलकर प्राण शरीर बनाते हैं। जैसे पाँच नदियाँ मिलकर एक झील। नाड़ियाँ — प्राण की सड़कें प्राण शरीर में 72,000 नाड़ियाँ हैं। तीन मुख्य — इड़ा — बायाँ, चंद्र, ठंडा। मन को शांत करती है। पिंगला — दायाँ, सूर्य, गर्म। कर्म कराती है। सुषुम्ना — बीच, रीढ़ में। जब चलती है, तब ध्यान लगता है। जब इड़ा-पिंगला बराबर चलें, प्राण शरीर साफ होता है। असंतुलन ही नकारात्मक ऊर्जा है। ज्यादा पिंगला — गुस्सा, जलन। ज्यादा इड़ा — आलस, डिप्रेशन। प्राण शरीर गंदा कैसे होता है अन्न शरीर गंदा होता है धूल से। प्राण शरीर गंदा होता है — गलत साँस — छाती से साँस, तेज साँस। प्राण उथला। बासी भाव — दिन भर की चिंता, ईर्ष्या। भाव प्राण में चिपकते हैं, जैसे धुआँ कपड़े में। दूसरों का स्पर्श — भीड़, अस्पताल, श्मशान। वहाँ प्राण शरीर में छेद हो जाते हैं। अनियमित दिनचर्या — रात को जागना, दिन में सोना। प्राण सूर्य से चार्ज होता है। लक्षण — बिना काम थकान, सुबह भारी सिर, लोगों के पास जाते ही ऊर्जा गिरना, नींद में झटके। साफ कैसे करें — सनातन विधि 1. साँस से — प्राणायाम सबसे सीधा। नाड़ी शोधन — बायाँ बंद, दायाँ से लो, दायाँ बंद, बायाँ से छोड़ो। 9 बार। यह इड़ा-पिंगला धोता है। भस्त्रिका — तेज साँस, प्राण शरीर की धूल झाड़ती है। 2. ध्वनि से — मंत्र ॐ का उच्चारण प्राण शरीर को ट्यून करता है। गायत्री की 24 ध्वनियाँ 24 नाड़ियों में कंपन देती हैं। जप के बाद हाथों में झुनझुनी — प्राण भर रहा है। 3. स्पर्श से — स्नान और हवा सुबह सूर्योदय से पहले ठंडे पानी से स्नान। पानी प्राण शरीर के छेद भरता है। पीपल या बरगद के नीचे 10 मिनट बैठो — पेड़ अपना प्राण देते हैं। 4. भोजन से प्राण शरीर को ताजा प्राण चाहिए। ताजा फल, अंकुरित अनाज, गाय का घी। बासी, फ्रिज का, माइक्रोवेव का भोजन — प्राण शून्य। 5. भाव से क्षमा। जब तुम किसी को मन से माफ करते हो, अपान प्राण खुलता है। कृतज्ञता — रोज तीन चीजें लिखो जिनके लिए शुक्रगुजार हो। समान प्राण संतुलित। प्राण शरीर और मृत्यु मृत्यु में अन्न शरीर छूटता है, प्राण शरीर 13 दिन तक सूक्ष्म रूप में रहता है। इसीलिए पिंड दान, दीप दान करते हैं — ताकि प्राण शरीर को दिशा मिले, भटके नहीं। जीवित रहते प्राण शरीर मजबूत हो तो मृत्यु आसान। उदान प्राण साफ हो तो आत्मा ऊपर खिंचती है, नीचे नहीं अटकती। आज के लिए प्रयोग रात को सोने से पहले — बिस्तर पर बैठो, रीढ़ सीधी। 3 गहरी साँस लो, छोड़ो। कल्पना करो — सिर से नीला प्रकाश आ रहा है, पूरे शरीर को धो रहा है, पैर से काला धुआँ निकल रहा है। 5 मिनट। फिर ॐ 3 बार। 7 दिन में फर्क — नींद गहरी, सुबह हल्का, लोगों की नेगेटिविटी कम चिपकेगी। सार अन्न शरीर को डॉक्टर ठीक करता है। प्राण शरीर को तुम ठीक करते हो। सनातन कहता है — "प्राणायाम परं तपः।" सबसे बड़ा तप साँस साधना है। क्योंकि जब प्राण शरीर साफ, तो मन अपने आप शांत, बुद्धि अपने आप तेज। तुम्हारा असली स्वास्थ्य हड्डी में नहीं, हवा में है। वह हवा दिखती नहीं, पर उसी से तुम दिखते हो। प्राण शरीर को रोज धोओ — जैसे दाँत ब्रश करते हो। फिर देखो, वही दुनिया हल्की लगेगी।
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00:10
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #👏भगवान विष्णु😇 मेरे भक्ति का फल बस इतना मिल जाये, मेरे माधव आज हैं मन जितना, भक्ति में कल और दुगुना मन लग जाये!! 🌺🌿🙏🏻 राधे राधे 🙏🏻🌿🌺 ❤️🥀🙏🏻 हरे कृष्णा 🙏🏻🥀❤️ ❤️❤️❤️❤️❤️❤️
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00:15
हे श्रीराधिके ! अहा ! आपके चरण-कमलों के नूपुरों की मन्द-मन्द झनकार मानों मतवाले भ्रमरों का गुञ्जन है। स्वामिनि आप की इसी मधुर रस की छटा से ये प्रकृति भी आनंदित हो रही है #👏भगवान विष्णु😇 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇
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00:28
माधुर्यादपि मधुरं मन्मथतातस्य किमपि कैशौरं। चापल्यादपि चपलं चेतो वत हरति हन्ति कि कूर्म:।। चित्त को व्याकुल कर देनेवाला श्रीकृष्ण का क्या अनिर्वचनीय कैशोर है ! वह माधुर्य से भी मधुर और चापल्य से भी चपल है। श्रीकृष्ण का वह कैशोर मेरे चित्त को हर लिया है, अब‌ मैं क्या करूॅं ? हे कृष्ण! करुणासिन्धु! दीनबन्धु! जगत्पते! गोपेश! गोपिकाकान्त! राधाकान्त! नमोऽस्तुते।। #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #👏भगवान विष्णु😇
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00:10
कृष्ण त्वदीय पद पंकज पंजरांके, अद्यैव मे विशतु मानस राजहंस:। प्राण प्रयाण समये कफ वात पित्तै:, कंठावरोधन विधौ स्मरणं कुतस्ते।। #👏भगवान विष्णु😇 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇
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00:15
🙏🌹जय शिव शंकर जय भोलेनाथ 🌹🙏 कर्पूर गौरम् करुणावतारं संसारसारम् भुजगेंद्रहारम् सदा वसंतम् हृदयारविंद्रम् भवम् भवानी सहितम् नमामि🙏 नागेंद्रहाराय त्रिलोचनाय भस्मांग रागाय महेश्वराय नित्याय शुद्धाय दिगंबराय तस्मै नमःशिवाय🙏🌹🙏🌹🙏🌹🙏 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #👏भगवान विष्णु😇
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00:26
🌺🌼🌺🌼🌺🌼🌺🙌🙌🌺🌼🌺🌼🌺🌼🌺🌼🌺 #जाके अधीन सदा ही सावरो,, या बृज को सिरताज #हमारी माई श्यामा जु को राज 🌺🌼🌺🌼🌹🙏श्री राधे कृपा केवलम 🙏🌹🌼🌺🍂 🥀💐🦚🌸🌼🌺🌞 #👏भगवान विष्णु😇 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇
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00:22
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #👏भगवान विष्णु😇 कृष्ण त्वदीय पद पंकज पंजरांके, अद्यैव मे विशतु मानस राजहंस:। प्राण प्रयाण समये कफ वात पित्तै:, कंठावरोधन विधौ स्मरणं कुतस्ते।। हे श्रीकृष्ण ! आपके पद पंकजों के पिंजड़े में आज ही ( वर्तमान) मेरा मन रूपी राज हंस विचरण कर रहा है। किन्तु प्राण प्रयाण के समय कफ वात पित्त दोषों से ग्रसित होकर कण्ठावरुद्ध होने पर(संभव है कि आपका) स्मरण कहां हो सकेगा।
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00:29
Jai jai shri Radhey #👏भगवान विष्णु की अद्भुत लीला😇 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇
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00:15
Jai Shri govind Damodar madhav #👏भगवान विष्णु की अद्भुत लीला😇 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇
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00:31