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संकर्षण चतुर्थी #व्रत एवं त्योहार
व्रत एवं त्योहार - २०२६ संकर्षण चतुर्थी हिन्दु पञ्चाङ्ग के अनुसार वैशाख शुक्ल चतुर्थी के दिन संकर्षण गणेश का व्रत एवं पूजन किया जाता है। संकर्षण गणेश को भगवान गणेश के विभिन्न रूपों में से एक माना जाता है। इस व्रत में को शङ्ख का दान किया जाता है। हिन्दु धर्मग्रन्थों में प्राप्त वर्णन के विशेष रूप সাম্মণী में मध्याह्न  अनुसार भगवान गणेश का प्राकट्य मध्याह्न काल में हुआ था। अतः इस व्रत काल के समय भगवान गणेश की पूजा करनी चाहिये। वैशाख शुक्ल चतुर्थी व्रत का हिन्दु धर्म में विशेष महत्त्व है। यह व्रत वैशाख मास के शुक्ल पक्ष तिथि को सम्पादित होता है। कुछ क्षेत्रों में शास्त्रीय विधान के अनुसार इस तिथि को सुमुख चतुर्थी गणेश की पूजा की जाती है। सुमुख भगवान गणेश के १२ विख्यात नामों में से एक है। तिथि को भगवान गणेश शास्त्रों में प्रिय तिथि मानी जाती है। गणेशपुराण, स्कन्दपुराण % निर्णयसिन्धु आदि धर्मग्रन्थों के अनुसार प्रत्येक शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को धर्मसिन्धु  व्रतराज, तथा भगवान गणेश का व्रत करने से विघ्नों का निवारण, मनोकामनाओं की पूर्ति तथा पुण्य की प्राप्ति होती है। विशेषतः वैशाख मास की चतुर्थी अत्यन्त शुभ मानी जाती है क्योंकि यह मास स्वयं गणेशपुराण के अनुसार - भगवान विष्णु को प्रिय एवं फलदायक माना गया है वैशाखे मासि सुमुखं यः समर्चयेत्। चतुर्थ्यां सर्वविघ्नविनिर्मुक्तः स सुखं लभते नरः।।  चतुर्थी को जो " अर्थात् - भक्त सुमुख गणपति का पूजन करता है, वह समस्त विघ्नों वैशाख मास की से मुक्त होकर सुख सम्पत्ति को प्राप्त करता है। २०२६ संकर्षण चतुर्थी हिन्दु पञ्चाङ्ग के अनुसार वैशाख शुक्ल चतुर्थी के दिन संकर्षण गणेश का व्रत एवं पूजन किया जाता है। संकर्षण गणेश को भगवान गणेश के विभिन्न रूपों में से एक माना जाता है। इस व्रत में को शङ्ख का दान किया जाता है। हिन्दु धर्मग्रन्थों में प्राप्त वर्णन के विशेष रूप সাম্মণী में मध्याह्न  अनुसार भगवान गणेश का प्राकट्य मध्याह्न काल में हुआ था। अतः इस व्रत काल के समय भगवान गणेश की पूजा करनी चाहिये। वैशाख शुक्ल चतुर्थी व्रत का हिन्दु धर्म में विशेष महत्त्व है। यह व्रत वैशाख मास के शुक्ल पक्ष तिथि को सम्पादित होता है। कुछ क्षेत्रों में शास्त्रीय विधान के अनुसार इस तिथि को सुमुख चतुर्थी गणेश की पूजा की जाती है। सुमुख भगवान गणेश के १२ विख्यात नामों में से एक है। तिथि को भगवान गणेश शास्त्रों में प्रिय तिथि मानी जाती है। गणेशपुराण, स्कन्दपुराण % निर्णयसिन्धु आदि धर्मग्रन्थों के अनुसार प्रत्येक शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को धर्मसिन्धु  व्रतराज, तथा भगवान गणेश का व्रत करने से विघ्नों का निवारण, मनोकामनाओं की पूर्ति तथा पुण्य की प्राप्ति होती है। विशेषतः वैशाख मास की चतुर्थी अत्यन्त शुभ मानी जाती है क्योंकि यह मास स्वयं गणेशपुराण के अनुसार - भगवान विष्णु को प्रिय एवं फलदायक माना गया है वैशाखे मासि सुमुखं यः समर्चयेत्। चतुर्थ्यां सर्वविघ्नविनिर्मुक्तः स सुखं लभते नरः।।  चतुर्थी को जो " अर्थात् - भक्त सुमुख गणपति का पूजन करता है, वह समस्त विघ्नों वैशाख मास की से मुक्त होकर सुख सम्पत्ति को प्राप्त करता है। - ShareChat