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क्या फितरत है ग़ालिब ✍️✍️ #सत्य वचन #🏠घर-परिवार #📖 कविता और कोट्स✒️ #जीवन की सीख #शायरी
शायरी - कैसी फ़ितरत है मेरी, ऐ ग़ालिब सोहबत में बस ख़ामिथाँ नज़र आती हैं কামল চীন মী सारी अच्छाइयाँ दिल में उतर आती हैं। raahein meri जाने क्थों al अहम् का सुरुर अक्सर जुदाई ही उतार कर जाती है। 9661 e t সেেগল ~ -"=1 7 s n ( { 56 " a ~   कैसी फ़ितरत है मेरी, ऐ ग़ालिब सोहबत में बस ख़ामिथाँ नज़र आती हैं কামল চীন মী सारी अच्छाइयाँ दिल में उतर आती हैं। raahein meri जाने क्थों al अहम् का सुरुर अक्सर जुदाई ही उतार कर जाती है। 9661 e t সেেগল ~ -"=1 7 s n ( { 56 " a ~ - ShareChat