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अक्षय तृतीया #पूजन विधि
पूजन विधि - तृतीया पर लक्ष्मीनारायण के रूप में भगवान विष्णु !ul 3& तृतीया पूजा विधि 318u अक्षय तृतीया अत्यन्त पवित्र एवं महान फल प्रदान करने वाली तिथि है। इसीलिये इस दिन सफलता की कामना से व्रतोत्सव आदि के अतिरिक्त वस्त्र, शस्त्र एवं आभूषणादि बनवाये अथवा धारण किये जाते हैं। इस दिन नवीन स्थान, संस्था एवं समाज आदि की स्थापना या उद्घाटन भी किया जाता है। तृतीया में यदि तृतीया तिथि, सोमवार एवं रोहिणी नक्षत्र, ये तीनों संयुक्त 3&4 हों, तो अत्यन्त श्रेष्ठ माना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु के नर ्नारायण एवं परशुराम अवतार की जयन्ती एकत्र होने के कारण व्रती को प्रातः स्नानादि से निवृत्त होकर निम्नोक्त सङ्कल्प ग्रहण करना चाहिये - ममाखिलपापक्षयपूर्वकसकलशुभफलप्राप्तये भगवत्प्रीतिकामनया देवपूजनमहं करिष्ये। उपरोक्त सङ्कल्प ग्रहण करने के उपरान्त भगवान विष्णु का यथाविधि षोडशोपचार पूजन करें। उन्हें पञ्चामृत से स्नान करायें , सुगन्धित पुष्पमाला पहनायें तथा नैवेद्य में भगवान नर नारायण के निमित्त सेके हुये जौ या गेहूँ का सत्तू तथा भगवान परशुराम के निमित्त कोमल ककड़ी अर्पित करें। यदि सम्भव हो तो इस दिन उपवास का पालन करते हुये समुद्रस्नान या गङ्गास्नान करें। तदुपरान्त जौ, गेहूँ, चने, सत्तू दही चावल, ईख के रस एवं दूध से निर्मित खाद्य पदार्थ जैसे खाण्ड, मावा, मिष्टान्न आदि का दान करें । सामर्थ्यानुसार कलश, धर्मघट, अन्न, सभी प्रकार के रस तथा सुवर्ण जलपूर्ण : ग्रीष्म ऋतु की उपयोगी वस्तुओं का दान भी करना चाहिये। इसके अतिरिक्त पितरों का श्राद्ध करें एवं ब्राह्मणों को भोजन भी करायें। इस प्रकार यथाशक्ति अक्षय तृतीया का पूजन करने से अनन्त फल प्राप्त होता है। तृतीया पर लक्ष्मीनारायण के रूप में भगवान विष्णु !ul 3& तृतीया पूजा विधि 318u अक्षय तृतीया अत्यन्त पवित्र एवं महान फल प्रदान करने वाली तिथि है। इसीलिये इस दिन सफलता की कामना से व्रतोत्सव आदि के अतिरिक्त वस्त्र, शस्त्र एवं आभूषणादि बनवाये अथवा धारण किये जाते हैं। इस दिन नवीन स्थान, संस्था एवं समाज आदि की स्थापना या उद्घाटन भी किया जाता है। तृतीया में यदि तृतीया तिथि, सोमवार एवं रोहिणी नक्षत्र, ये तीनों संयुक्त 3&4 हों, तो अत्यन्त श्रेष्ठ माना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु के नर ्नारायण एवं परशुराम अवतार की जयन्ती एकत्र होने के कारण व्रती को प्रातः स्नानादि से निवृत्त होकर निम्नोक्त सङ्कल्प ग्रहण करना चाहिये - ममाखिलपापक्षयपूर्वकसकलशुभफलप्राप्तये भगवत्प्रीतिकामनया देवपूजनमहं करिष्ये। उपरोक्त सङ्कल्प ग्रहण करने के उपरान्त भगवान विष्णु का यथाविधि षोडशोपचार पूजन करें। उन्हें पञ्चामृत से स्नान करायें , सुगन्धित पुष्पमाला पहनायें तथा नैवेद्य में भगवान नर नारायण के निमित्त सेके हुये जौ या गेहूँ का सत्तू तथा भगवान परशुराम के निमित्त कोमल ककड़ी अर्पित करें। यदि सम्भव हो तो इस दिन उपवास का पालन करते हुये समुद्रस्नान या गङ्गास्नान करें। तदुपरान्त जौ, गेहूँ, चने, सत्तू दही चावल, ईख के रस एवं दूध से निर्मित खाद्य पदार्थ जैसे खाण्ड, मावा, मिष्टान्न आदि का दान करें । सामर्थ्यानुसार कलश, धर्मघट, अन्न, सभी प्रकार के रस तथा सुवर्ण जलपूर्ण : ग्रीष्म ऋतु की उपयोगी वस्तुओं का दान भी करना चाहिये। इसके अतिरिक्त पितरों का श्राद्ध करें एवं ब्राह्मणों को भोजन भी करायें। इस प्रकार यथाशक्ति अक्षय तृतीया का पूजन करने से अनन्त फल प्राप्त होता है। - ShareChat