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#सत_भक्ति_संदेश कर्म सत का सौदा जो करै,दम्भ छल छिद्र त्यागै। अपने भाग का धन लहै,परान विष सम लागे ।। अपने जीवन में परमात्मा से डरकर सत्य के आधार से सर्व कर्म करने चाहिएं जो अपने भाग्य में धन लिखा है, उसी में संतोष करना चाहिए। परधन को विष के समान समझे।
सत_भक्ति_संदेश - १८ पयत सदेश छिद्र  सत का सौदा जो करै॰ दम्भ छल त्यागै।  अपने भाग का धन लहै॰ परधन विष सम लागै।। अपने जीवन में परमात्मा से डरकर सत्य के आधार से सर्व कर्म करने चाहिएं जो अपने भाग्य में धन लिखा है॰ उसी में संतोष करना चाहिए।  परधन को विष के समान समझे। जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज SANT RAMPAL SPIRITUAL LEADER SUPREMEGOD ORG @SAINTRAMPAUIM SAINT RAMPAL JI MAHARA १८ पयत सदेश छिद्र  सत का सौदा जो करै॰ दम्भ छल त्यागै।  अपने भाग का धन लहै॰ परधन विष सम लागै।। अपने जीवन में परमात्मा से डरकर सत्य के आधार से सर्व कर्म करने चाहिएं जो अपने भाग्य में धन लिखा है॰ उसी में संतोष करना चाहिए।  परधन को विष के समान समझे। जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज SANT RAMPAL SPIRITUAL LEADER SUPREMEGOD ORG @SAINTRAMPAUIM SAINT RAMPAL JI MAHARA - ShareChat