#सत_भक्ति_संदेश
कर्म
सत का सौदा जो करै,दम्भ छल छिद्र त्यागै।
अपने भाग का धन लहै,परान विष सम लागे ।।
अपने जीवन में परमात्मा से डरकर सत्य के आधार से सर्व कर्म करने चाहिएं जो अपने भाग्य में धन लिखा है, उसी में संतोष करना चाहिए।
परधन को विष के समान समझे।


