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#🖋ग़ालिब की शायरी
🖋ग़ालिब की शायरी - ೯r ತ್ತಣ एक पत्ता भी गिरता की मर्जी से ग़ालिब , ये जो गिरते आंसु है तुम्हारे क्या वो रब नहीं देखता होगा, ೯r ತ್ತಣ एक पत्ता भी गिरता की मर्जी से ग़ालिब , ये जो गिरते आंसु है तुम्हारे क्या वो रब नहीं देखता होगा, - ShareChat