Guruk Bete
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honestly believe that history will be kinder to me than the contemporary media or for that matter the Opposition parties in Parliament."
(मुझे पूरा विश्वास है कि समकालीन मीडिया या संसद में विपक्षी दलों की तुलना में इतिहास मेरे प्रति अधिक दयालु रहेगा।)
— डॉ. मनमोहन सिंह
⬛ कोयला घोटाला मामला (मामले की पूरी जानकारी)
आरोप क्या था?: साल 2005 में ओडिशा के 'तलबीरा-II' कोयला ब्लॉक को निजी कंपनी हिंडालको (Hindalco) को आवंटित करने में अनियमितता के आरोप लगे थे। उस समय कोयला मंत्रालय का प्रभार खुद तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह जी के पास था।
विशेष अदालत का फैसला: सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट के बावजूद, 11 मार्च 2015 को एक विशेष अदालत ने पूर्व पीएम को बतौर आरोपी समन (बुलावा) जारी कर दिया था, जिससे उनकी बेदाग छवि पर गहरा आघात लगा।
🏛️ मामले से कब बरी हुए?
सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला: 29 जुलाई 2026 को भारत के सर्वोच्च न्यायालय (CJI सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच) ने विशेष अदालत के 2015 के आदेश को पूरी तरह खारिज कर दिया।
कोर्ट ने माना कि सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को ठुकराने का कोई ठोस आधार नहीं था और डॉ. मनमोहन सिंह जी को पूरी तरह ससम्मान (Clean Chit) बरी कर दिया।
⏳ निधन के कितने दिन बाद मिला न्याय?
निधन की तारीख: 26 दिसंबर 2024
फैसले की तारीख: 29 जुलाई 2026
डॉ. मनमोहन सिंह जी को यह न्याय उनके निधन के ठीक 580 दिन बाद (लगभग 1 साल 7 महीने बाद) मिला, जिसे वे अपने जीवनकाल में नहीं देख सके।
इतने सालों के लंबे इंतजार और दुनिया से चले जाने के बाद न्याय मिलना... क्या वाकई इसे न्याय कहा जा सकता है?
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