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#☝अनमोल ज्ञान #👌 अच्छी सोच👍 #🌸 सत्य वचन #❤️जीवन की सीख #👉 लोगों के लिए सीख👈
☝अनमोल ज्ञान - "श्री सदगुरूदेवाय नमः अनादि काल से मनुष्य सुख़-्शांति की कामना करता है प्राप्त करने प्रयास एवं उपाय करता रहता है। वह धन-्दौलत कमाता है सुखन्शांति के लिए। मकान महल सुख़न्शांतिके लिए। स्त्री प्रेमिका सुख़-्शांतिके लिए। दान-्पुण्य तपऱ्योग जो कुछ करता है सुख़न्शांति के लिए। जंगली युग से लेकर आज के उन्नत एवं वैज्ञानिक युग तक मनुष्य लगातार सुखन्शांति के साधनों को उन्नत करता आया है। सुखन्शांति की खोज में आकाश- पाताल भी आज तक उसे सुखन्शांति प्राप्त हो पाई है? पूर्व काल की विशेषता आज का मृनुष्य कहीं अघिक एककरदिए,पर क्या उन्नत और समृद्धॅहै पर सुख-्शांति को तब भी न पा सका। बल्कि सत्य तो यहॅहै कि वह पूर्व काल की रिक्त्ता आज कहीं अधिक व्यस्त एवं सीमांत दुःख एवं अशांति के अंधकार में भटक गई है। सुख़-्शांति की खोज करता-् करता मनुष्य दुख एवं अशांति का ग्रास क्यों बन रहा है,यह सोचने की बातॅहै। बाबूलाल बाबूलाल . "श्री सदगुरूदेवाय नमः अनादि काल से मनुष्य सुख़-्शांति की कामना करता है प्राप्त करने प्रयास एवं उपाय करता रहता है। वह धन-्दौलत कमाता है सुखन्शांति के लिए। मकान महल सुख़न्शांतिके लिए। स्त्री प्रेमिका सुख़-्शांतिके लिए। दान-्पुण्य तपऱ्योग जो कुछ करता है सुख़न्शांति के लिए। जंगली युग से लेकर आज के उन्नत एवं वैज्ञानिक युग तक मनुष्य लगातार सुखन्शांति के साधनों को उन्नत करता आया है। सुखन्शांति की खोज में आकाश- पाताल भी आज तक उसे सुखन्शांति प्राप्त हो पाई है? पूर्व काल की विशेषता आज का मृनुष्य कहीं अघिक एककरदिए,पर क्या उन्नत और समृद्धॅहै पर सुख-्शांति को तब भी न पा सका। बल्कि सत्य तो यहॅहै कि वह पूर्व काल की रिक्त्ता आज कहीं अधिक व्यस्त एवं सीमांत दुःख एवं अशांति के अंधकार में भटक गई है। सुख़-्शांति की खोज करता-् करता मनुष्य दुख एवं अशांति का ग्रास क्यों बन रहा है,यह सोचने की बातॅहै। बाबूलाल बाबूलाल . - ShareChat