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- Ravinder Bishnoi#🌺 श्री रामचरितमानस चौपाई 🌺 #🙏हनुमान चालीसा🏵 #राम #🙏 जय हनुमान #श्री रामचरितमानस पाठ 🕉️77
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- Ravinder Bishnoi#श्री रामचरितमानस पाठ 🕉️ #🙏 जय हनुमान #🌺 श्री रामचरितमानस चौपाई 🌺 #🙏हनुमान चालीसा🏵 #राम1113
- sn vyas#श्रीरामचरितमानस चोपाई #श्रीरामचरितमानस 🪷 #जय श्री राम #रामायण ज्ञान #रामायण चौपाई यह चौपाई हमें सिखाती है कि जीवन की वास्तविक संपन्नता और शांति धन-दौलत में नहीं, बल्कि ईश्वर के प्रति निष्काम भक्ति और समर्पण में है। प्रभु चरणों में प्रीति होते ही मन के सारे विकार दूर हो जाते हैं और जीवन में परम आनंद व शांति का आगमन होता है। ईश्वर से विमुख व्यक्ति सदैव अपनी इच्छाओं और वासनाओं का दास बना रहता है। वह संसार के सामने हाथ फैलाता है और भीतर से स्वयं को हमेशा अधूरा तथा असहाय महसूस करता है। सांसारिक सुख क्षणिक होते हैं। भौतिक वस्तुएँ मिलने पर खोने का भय और न मिलने पर असंतोष रहता है। इसलिए प्रभु प्रेम से वंचित व्यक्ति मानसिक और आत्मिक रूप से निरंतर दुखी रहता है। तुलसीदास जी समझाते हैं कि ईश्वर के चरण ही जीव के लिए अंतिम आश्रय हैं। जब तक जीव संसार के नश्वर पदार्थों, धन, पद और मान-सम्मान में सुख खोजता रहता है, तब तक उसे स्थायी शांति नहीं मिलती। सच्चा और अक्षय आनंद केवल ईश्वर के चरणों की भक्ति में ही निहित है। अति दीन मलीन दुखी नितहीं। जिन्ह कें पद पंकज प्रीति नहीं॥ अवलंब भवंत कथा जिन्ह कें। प्रिय संत अनंत सदा तिन्ह कें॥ भावार्थ जिन्हें आपके चरणकमलों में प्रीति नहीं है वे नित्य ही अत्यंत दीन, मलिन (उदास) और दुःखी रहते हैं और जिन्हें आपकी लीला कथा का आधार है, उनको संत और भगवान सदा प्रिय लगने लगते हैं॥2322
- Ravinder Bishnoi#श्री रामचरितमानस पाठ 🕉️ #🌺 श्री रामचरितमानस चौपाई 🌺 #राम #🙏 जय हनुमान1316
- सनातनी ज्ञान#🌞गुड मॉर्निंग☕🌞 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🌺 श्री रामचरितमानस चौपाई 🌺 #रामचरितमानस #रामचरितमानस चौपाई #श्री रामचरितमानस 🕉️2021
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- sn vyas#रामचरितमानस #🌺 श्री रामचरितमानस चौपाई 🌺 तुलसीकृत रामायण - अश्रुओं से लिखी गई करुणा🙏 गोस्वामी तुलसीदास जी ने रामायण नहीं लिखी... उन्होंने अपना हृदय खोलकर रख दिया। तुलसीदास जी काशी की गलियों में भटक रहे थे। दर-दर की ठोकरें, समाज का तिरस्कार, और अंदर एक ही प्यास - "प्रभु के दर्शन"। जब संसार ने दरवाजे बंद कर दिए, तब उन्होंने राम का दरवाजा खटखटाया। हर चौपाई के पीछे एक आँसू है। हर दोहे में एक सिसकी है। "*सिया राम मय सब जग जानी, करहुं प्रणाम जोरि जुग पानी*" ये शब्द नहीं हैं मित्रों... ये एक टूटे हुए इंसान की प्रार्थना है। तुलसीदास जी ने राम को राजा नहीं बनाया। उन्होंने राम को अपना भाई, अपना बेटा, अपना सखा बना लिया। जब राम वनवास जाते हैं तो तुलसी रोते हैं। जब सीता का हरण होता है तो तुलसी की छाती फटती है। जब लक्ष्मण मूर्छित होते हैं तो लगता है तुलसी का अपना भाई गिर पड़ा। इसीलिए पढ़ते समय लगता है कोई अपना ही दुख सुना रहा है। *वनवास वाला दृश्य:* "*पिता बचनु भयउ बन गमनू, तजि राजु रामु गए कननू*" एक पंक्ति में पिता का वचन, राज का त्याग, और वन की राह... आँखें भर आती हैं। चौदह साल तक खड़ाऊं रखकर राज्य चलाने वाला भाई... जब राम से मिलता है तो दोनों एक दूसरे के गले लगकर इतना रोते हैं कि अयोध्या की मिट्टी भी भीग जाती है। तुलसी यहाँ सबसे ज्यादा रोए होंगे। एक पत्नी का अपमान... और राम का मौन। उस मौन में हजारों स्त्रियों का दर्द है। क्योंकि ये कहानी नहीं है। ये आईना है। इसमें रावण हमारा अहंकार है। इसमें मंथरा हमारी कुटिलता है। इसमें कैकेयी हमारा स्वार्थ है। और राम... राम हमारी वो उम्मीद हैं जो सबसे बुरे समय में भी हाथ नहीं छोड़ते। तुलसीदास जी ने हमें दोषी नहीं ठहराया। बस राम का चरित्र सामने रख दिया और कहा - "*देख लो, ऐसे जिया जाता है*"। तुलसीकृत रामायण को पढ़कर कोई सूखी आँखों से नहीं उठ सकता। क्योंकि ये ग्रंथ नहीं है... ये एक माँ की लोरी है, एक पिता का उपदेश है, एक मित्र का कंधा है। जब दुनिया बहुत कठोर लगने लगे, जब मन का श्मशान जलने लगे... तब तुलसी की एक चौपाई सब घाव भर देती है: *"राम नाम सुमिरत सब काजा। होत न मन में कछु पाजा॥"* *जय सिया राम* 🌸1012
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