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#बलिदान दिवस #🙏🏻माँ तुझे सलाम #शहीद दिवस #🇮🇳 देशभक्ति #आज जिनकी पुण्यतिथि है
बलिदान दिवस - आजादी तो केवल चरखे ने दिलाई? मेरे ज़ज़्बातों से किस क़दर वाकिफ है मेरी कलमः इश्क़ लिखना भी चाहूँ तो इंकलाब लिख देती है।। ऐसी ही क्रांतिकारी विचारों से ओतप्रोत क्रांतिकारी अनिल सेन जी ने १८ जून १ ९०६ को बंगाल की क्रांतिकारी भूमि पर जन्म लिया था। अनिल सेन जी अपने क्रांतिकारी साथियों के बीच मानवतावादी विचारों तथा क्रांतिकारी लिए प्रसिद्ध थे। वे अपने क्रांतिकारी साहित्य के प्रकाशन के लेखों को प्रकाशित कर जनता के बीच बांटा करते थे, ताकि লিব जनमानस को आज़ादी के जागृत किया जा सके। साथियों इसी क्रांतिकारी साहित्य ने अंग्रेजों की नींद उड़ा रहा थी, जिसके कारण ब्रिटिश सरकार ने इन पर देशद्रोह कानून लगाकर ढाका जेल में डाल दिया और १७ जून का १९३२ को जेल में ही हत्या कर डाली। अनिलसेन आजादी तो केवल चरखे ने दिलाई? मेरे ज़ज़्बातों से किस क़दर वाकिफ है मेरी कलमः इश्क़ लिखना भी चाहूँ तो इंकलाब लिख देती है।। ऐसी ही क्रांतिकारी विचारों से ओतप्रोत क्रांतिकारी अनिल सेन जी ने १८ जून १ ९०६ को बंगाल की क्रांतिकारी भूमि पर जन्म लिया था। अनिल सेन जी अपने क्रांतिकारी साथियों के बीच मानवतावादी विचारों तथा क्रांतिकारी लिए प्रसिद्ध थे। वे अपने क्रांतिकारी साहित्य के प्रकाशन के लेखों को प्रकाशित कर जनता के बीच बांटा करते थे, ताकि লিব जनमानस को आज़ादी के जागृत किया जा सके। साथियों इसी क्रांतिकारी साहित्य ने अंग्रेजों की नींद उड़ा रहा थी, जिसके कारण ब्रिटिश सरकार ने इन पर देशद्रोह कानून लगाकर ढाका जेल में डाल दिया और १७ जून का १९३२ को जेल में ही हत्या कर डाली। अनिलसेन - ShareChat