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#जय माँ गायत्री जय गुरुवर
जय माँ गायत्री जय गुरुवर - हरि शरणं गिरा अरथ जल बीचि सम कहिअत भिन्न न भिन्न बंदउँ सीता राम पद जिन्हहि परम प्रिय खिन्न जो वाणी और उसके अर्थ तथा जल और जल की लहर के समान कहने में अलग-्अलग हैं, परन्तु वास्तव में अभिन्न (एक) उन श्री सीतारामजी के चरणों की मैं वंदना करता हूँ॰ जिन्हें , दीननदुःखी बहुत ही प्रिय हैं हरि शरणं गिरा अरथ जल बीचि सम कहिअत भिन्न न भिन्न बंदउँ सीता राम पद जिन्हहि परम प्रिय खिन्न जो वाणी और उसके अर्थ तथा जल और जल की लहर के समान कहने में अलग-्अलग हैं, परन्तु वास्तव में अभिन्न (एक) उन श्री सीतारामजी के चरणों की मैं वंदना करता हूँ॰ जिन्हें , दीननदुःखी बहुत ही प्रिय हैं - ShareChat