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#હિન્દુ ધર્મ (#@MHS143) ##@MHS143 #@MHS143 ##@VIJAY & NAYANA #@VIJAY & NAYANA
હિન્દુ ધર્મ (#@MHS143) - श्रीराम श्रीराम Il श्री Il श्री राम जी की आरती श्री रामचन्द्र कृपालु भज मन, हरण भवभय दारुणम् लोदन, कंज-मुख, कर-कंज , नवकज  पद-कजारुणम् कन्दर्प अगणित अमित छबि, नवनील नीरद सुन्दरम् पटपीत मानहुूँ तड़ित रुचि, शुचि नौमि जनक-सुतावरम् II भजु दीनबन्धु दिनेश दानव, दैत्यवंश निकन्दनम् रधुनन्द आनन्दकन्द, कोशलचन्द दशरथ नन्दनम् ।l   सिर मुकुट कुण्डल तिलक चारु विभूषणम् उदारु अंग आजानुभुज शर-चामधर , संग्राम-्जित  खर दूषणम् इति वदति तुलसीदास, -शेष- मुनि-मन-रंजनम्।  शकर- हृदय-्कंज निवास कुरु, कामादि मम বরল-এল-যাঁতনমূ Il दोहा मनु जाहिं राचेउ मिलहि सो बरु, सहज सुन्दर साँवरो | निधान सुजान शील सनेहु जानत रावरो करुणा जय श्री राम Y7 1 ' AIIHII Anillchig श्रीराम श्रीराम Il श्री Il श्री राम जी की आरती श्री रामचन्द्र कृपालु भज मन, हरण भवभय दारुणम् लोदन, कंज-मुख, कर-कंज , नवकज  पद-कजारुणम् कन्दर्प अगणित अमित छबि, नवनील नीरद सुन्दरम् पटपीत मानहुूँ तड़ित रुचि, शुचि नौमि जनक-सुतावरम् II भजु दीनबन्धु दिनेश दानव, दैत्यवंश निकन्दनम् रधुनन्द आनन्दकन्द, कोशलचन्द दशरथ नन्दनम् ।l   सिर मुकुट कुण्डल तिलक चारु विभूषणम् उदारु अंग आजानुभुज शर-चामधर , संग्राम-्जित  खर दूषणम् इति वदति तुलसीदास, -शेष- मुनि-मन-रंजनम्।  शकर- हृदय-्कंज निवास कुरु, कामादि मम বরল-এল-যাঁতনমূ Il दोहा मनु जाहिं राचेउ मिलहि सो बरु, सहज सुन्दर साँवरो | निधान सुजान शील सनेहु जानत रावरो करुणा जय श्री राम Y7 1 ' AIIHII Anillchig - ShareChat