#जय श्री महाकाल #जय श्री महाकाल बाबा
‼️गंडकी नदी के किनारे बसे एक गांव में शंकर नाम के एक परम भक्त ब्राह्मण रहते थे। वे बड़ी श्रद्धा के साथ शालिग्राम भगवान की आराधना करते थे और अपना जीवन धर्म के मार्ग पर चलते हुए व्यतीत करते थे। उसी गांव में एक धर्मात्मा जमींदार थे, जो शंकर भगत का बहुत सम्मान करते थे और उन्हें अपने मंदिर की सेवा और पाठशाला के संचालन के लिए आर्थिक सहायता भी देते थे।
प्राचीन काल में उज्जैन नगरी में राजा चंद्रसेन राज्य करते थे। वे भगवान शिव के अनन्य भक्त थे। उनकी भक्ति की ख्याति चारों ओर फैली हुई थी, जिससे उनके पड़ोसी राजा ईर्ष्या करने लगे। उन शत्रु राजाओं ने एक साथ मिलकर उज्जैन पर आक्रमण करने की योजना बनाई। जब राजा चंद्रसेन को इस संकट का पता चला, तो वे घबराए नहीं। उनका अटूट विश्वास था कि उनके रक्षक स्वयं महादेव हैं। वे निश्चिंत होकर भगवान शिव के अभिषेक और पूजन में लीन हो गए।
🧘ग्वाल बालक की निष्काम भक्ति🧘
उसी समय एक छोटा सा ग्वाल बालक (गोपी का पुत्र), जिसकी आयु मात्र छह वर्ष थी, राजा को शिव अर्चना करते हुए देख रहा था। राजा की भक्ति देख उस बालक के मन में भी शिव पूजा की तीव्र इच्छा जागृत हुई। वह एक सुनसान स्थान पर गया और मिट्टी का एक शिवलिंग बनाकर पूरी तन्मयता से उसकी पूजा करने लगा। वह शिव की भक्ति में इतना खो गया कि उसे भूख- प्यास का भी होश नहीं रहा।
🤱मां का क्रोध और बालक की करुण पुकार🤱
जब बालक की मां उसे भोजन के लिए बुलाने आई, तो उसने भोजन करने से मना कर दिया और अपनी पूजा जारी रखी। इस पर मां को क्रोध आ गया और उसने बालक को मारा और उसके द्वारा बनाए गए मिट्टी के शिवलिंग को उठाकर फेंक दिया। अपने आराध्य का अनादर देख बालक बिलख-बिलख कर रोने लगा और हृदय से महादेव को पुकारने लगा।
🕉️महाकालेश्वर का प्राकट्य🕉️
बालक की उस सच्ची और करुण पुकार को सुनकर भगवान शिव अत्यंत प्रसन्न हुए। देखते ही देखते वहां धरती फाड़कर स्वयं महाकाल प्रकट हो गए और वहां एक विशाल और भव्य मंदिर निर्मित हो गया। यह चमत्कार देखकर पूरी उज्जैन नगरी स्तब्ध रह गई। राजा चंद्रसेन ने जब यह सुना, तो वे तुरंत वहां पहुंचे और उस बालक की भक्ति को नमन किया।
👩❤️👩शत्रु राजाओं का हृदय परिवर्तन👩❤️👩
जब आक्रमण करने आए पड़ोसी राजाओं को इस घटना का पता चला, तो वे समझ गए कि जिस राज्य पर स्वयं महादेव की कृपा हो और जहां ऐसे महान भक्त हों, उससे युद्ध करना विनाशकारी होगा। उन्होंने अपना अपराध स्वीकार किया, राजा चंद्रसेन से क्षमा मांगी और युद्ध का विचार त्याग कर उनके मित्र बन गए।
🙏राधे राधे 🙏


