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#📖जीवन का लक्ष्य🤔 #🙏गीता ज्ञान🛕 #❤️जीवन की सीख #🙏 प्रेरणादायक विचार #मेरे विचार
📖जीवन का लक्ष्य🤔 - 271 औप्रैल ज्यों -ज्यों मनुष्य का अन्तःकरण निर्मल और निष्पाप होता जाता है, त्यों-्त्यों उसे अपने छोटे छोटे दोष भी दिखाई देने लगते हैं। अपने दोषों की स्वीकृति से चित्त को बड़ा समाधान होता है। इससे वह अपने प्रति कठोर और दूसरे के प्रति उदार होता जाता है। MN 271 औप्रैल ज्यों -ज्यों मनुष्य का अन्तःकरण निर्मल और निष्पाप होता जाता है, त्यों-्त्यों उसे अपने छोटे छोटे दोष भी दिखाई देने लगते हैं। अपने दोषों की स्वीकृति से चित्त को बड़ा समाधान होता है। इससे वह अपने प्रति कठोर और दूसरे के प्रति उदार होता जाता है। MN - ShareChat