2122 1212 22/112
रूह से तो कभी जुदा न हुआ
पर मोहब्बत पे भी खरा न हुआ
लुट गई दुनियां मुहब्बत में
फिर भी उन से कोई शिफा न हुआ
सजदे में सर झुका रहा हर दम
इश्क का वो मगर खुदा न हुआ
प्यास बुझी नही अभी दिल की
हक अभी इश्क का अदा न हुआ
कत्ल कर के भी कह दिया कातिल
और ज्यादा कुछ भी बुरा न हुआ
आ रही खुशबू इन हवाओं से
उनके यादों से फासला न हुआ
( लक्ष्मण दावानी ✍ )
6/10/2017 #📜मेरी कलम से✒️ #✒ शायरी #💝 शायराना इश्क़ #शायरी #📚कविता-कहानी संग्रह


